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एक तरफ पर्यावरण बचाव समिति मीट फैक्ट्री स्वामियों पर भूजल को गंदा करने का आरोप लगा रहा है, दूसरी ओर मीट फैक्ट्री स्वामी अवैध वसू

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अमर उजाला ब्यूरो
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खरखौदा। पर्यावरण बचाव संघर्ष समिति ने मीट फैक्टरियों पर गंदे पानी को रिबोर के जरिए जमीन में उतारकर भूजल को दूषित करने का आरोप लगाया है। इसलिए मीट फैक्टरियों को क्षेत्र से हटाने को लेकर लगातार प्रदर्शन एवं जनसभाएं जारी हैं। उधर, एक मीट फैक्ट्री स्वामी ने इस अभियान को केवल सफेदपोश द्वारा अवैध वसूली की मांग करना बताया है। इस मामले में थाने में तहरीर दी है।
पर्यावरण बचाव संघर्ष समिति ने पर्यावरण बेहतरी के लिए अभियान छेड़ रखा है। समिति का आरोप है कि हापुड़ रोड पर फैली करीब दो दर्जन फैक्टरियों के दूषित पानी से भूजल प्रदूषित हो रहा है। उसके निस्तारण का कोई साधन नहीं है। इससे क्षेत्र में कैंसर, लीवर से संबंधित कई गंभीर बीमारियां फैली हुई हैं। समिति का आरोप है कि इस मीट व्यवसायी राजनीतिक दलों का सरंक्षण प्राप्त है। केवल भाजपा सरकार ही इस क्षेत्र से मीट फैक्टरियों को बंद कराकर राहत दिला सकती हैं। इन फैक्टरियों को यहां से हटाने के लिए पर्यावरण बचाव संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर के नेतृत्व में पूरे जिले में आंदोलन जारी है। तीन फरवरी को जिमखाना मैदान में जनसभा प्रस्तावित है। जिसको लेकर समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर के नेतृत्व में नरहाड़ा, घोसीपुर फफूंडा, अल्लीपुर, धनौटा, बिजौली, खरखौदा, बहरानुपर, अतराड़ा सहित कई गांवों में जनसंपर्क किया जा रहा है।
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एक मीट फैक्ट्री मालिक ने सोमवार को थाना में तहरीर देकर आरोप लगाया कि सफेदपोश मीट फैक्टरियों ने अवैध वसूली का दबाव बना रहे हैं। फैक्ट्री मालिकों ने इनकार कर दिया तो झूठे आरोप लगाकर उनका कारोबार बंद कराना चाह रहे हैं। फैक्ट्री में ईटीपी द्वारा पानी साफ कर फैक्ट्री में ही पेड़-पौधों को दिया जाता है। पानी रिबोर कर नीचे नहीं उतारा जा रहा है।
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एक फैक्ट्री में कई लाख लीटर प्रतिदिन पानी प्रयोग किया जाता है। यदि पानी रिबोर नहीं हो रहा और न ही फैक्ट्री से बाहर जा रहा है तो इस क्षेत्र में गंदे पानी का तालाब कहां से बन गया। फैक्ट्री बंद नहीं होने तक अभियान जारी रहेगा। -रविंद्र गुर्जर, अध्यक्ष पर्यावरण बचाव संघर्ष समिति
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