बहसूमा। रामराज अनाज मंडी में धान की फसल आने से चहल पहल शुरू हो गई है। शनिवार को मंडी में किसान धान लेकर पहुंचे। व्यापारियों का कहना है कि विगत आठ वर्षों के बाद आई बाढ़ ने रामराज खादर क्षेत्र के करीब बीस गांवों की फसल को प्रभावित किया है। खासकर रामराज खादर क्षेत्र कुछ किसानों ने इस बार गन्ने की आपूर्ति करने में पर्चियों में हुए फर्जीवाडे़ को ध्यान में रखते हुए धान का क्षेत्रफल को बढ़ाया था।
किसान सौभाग्यवरी मान का कहना है कि विगत वर्षों के मुकाबले इस बार आई बाढ़ ने खादर क्षेत्र की धान की फसल को तहस-नहस कर दिया है। इस बार किसानों की बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फसल की लागत भी शायद ही निकल पाए। पिछले सालों में 25-30 कुंतल प्रति एकड़ की उपज निकली है। वहीं, इस बार खादर क्षेत्र के बहुतायत किसानों ने अगेती प्रजाति में सवा 127 हाईब्रिड लगाई। इसका उत्पादन 20-25 कुंतल प्रति एकड़ निकल पा रहा है। हालांकि गत वर्ष में यही धान 35-40 कुंतल प्रति एकड़ निकला था।
पिछले सालों में धान की फसल बासमती 1509 अग्रिम प्रजाति का भाव प्रारंभ में 1640 एवं बाद 23 सौ रुपये प्रति कुंतल रहा था। किसानों के पास धान लगभग समाप्त हो चुका था। इस बार प्रदेश सरकार ने रेट में 200 रुपये प्रति कुंतल इजाफा किया है। हालांकि किसानों ने इसे नाकाफी बताया है।
किसान सचिन गुर्जर का कहना है कि धान की फसल खेतों में घटोतरी की ओर है। किसानों को एक बार धान के भाव में बढ़ोतरी की है। इस बार फसल में बाढ़ के पानी ने रामराज खादर क्षेत्र के करीब 20 गांवों सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो गई है। खेतों में पानी के अधिक समय तक रहने से धान में पांग आ गई है। जिससे व्यापारी तथा किसान दोनों को हानि हुई है। किसान श्रीपाल कोहली का कहना है कि धान हो चाहे गन्ना किसानों को लागत के हिसाब से भाव नहीं मिलते हैं।
व्यापारी राजीव छाबड़ा का कहना है कि इस बार किसानों के धान की फसल बर्बाद हो गई है। पिछले सालों में किसानों को पांग से निजात मिल रही थी। इस बार किसानों ने गन्ने के भुगतान एवं गन्ना आपूर्ति की फजीहत को देखते हुए धान की फसल का रामराज खादर क्षेत्र के किसानों ने क्षेत्रफल बढ़ाया था। व्यापारी अजय अग्रवाल का कहना है कि पिछले कई सालों में बाढ़ का पानी निकल जाने से धान में पांग से निजात मिल जाती थी। इस बार धान पर पांग जम गई है।
व्यापारी रोहित अग्रवाल उर्फ मोनू का कहना है कि धान की फसल की आवक शुरू हो गई है। प्रजाति सुगंध बासमती का भाव गत वर्ष 25 सौ रुपये बिकी जबकि इस बार अभी आई नहीं है।
व्यापारी सुरेंद्र आहुजा का कहना है कि इस बार खादर क्षेत्र में आई बाढ़ ने धान की फसल को लगभग समाप्त कर दिया है।
व्यापारी सुदर्शन पाहवा का कहना है कि इस बार कम पैदावार होने से किसान एवं व्यापारी दोनों दुखी हैं। पिछले साल किसानों ने धान की बंपर पैदावार होने से व्यापारियों का फसल में लिया गया धन लौटा दिया था। इस बार लग रहा है कि शायद किसान व्यापारियों से लिया कर्ज अदा नहीं कर पायेंगेे।
मुख्य बातें
बाढ़ से धान की फसल खराब हो जाने से पैदावार घटी
धान के भाव में बढ़ोतरी को नाकाफी बता रहे हैं किसान