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मोबाइल एप में दर्ज होगा हर चरण, अब नहीं रुकेगा टीकाकरण

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मोबाइल एप में दर्ज होगा हर चरण, अब नहीं रुकेगा टीकाकरण
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मेरठ। स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिसमें हर टीकाकरण का रिकॉर्ड दर्ज होगा। कहीं विरोध हुआ है, वैक्सीन की कमी या फिर स्टाफ समय से नहीं पहुंचा है, यानि सभी तरह की जानकारी उसमें मौके पर निगरानी के लिए जाने वाले अफसर को दर्ज करनी होगी। इससे टीकाकरण में आने वाले परेशानी को तुरंत दूर किया जा सकेगा और ज्यादा से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण हो सकेगा।
बच्चे सेहतमंद रहें इसके लिए स्वास्थ्य विभाग हर बुधवार और शनिवार को नियमित टीकाकरण करता है, जिससे आठ बीमारियों (टीबी, काली खांसी, गलघोंटू, टिटनस, पीलिया, निमोनिया, खसरा और पोलियो) से बचाव होता है। लगातार अभियान केबावजूद हजारों बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं। कहीं वैक्सीन खत्म हो जाती है तो कहीं स्टाफ लापरवाही बरतता है। इसकी निगरानी करने वाले अफसर इसकी रिपोर्ट देने में करीब एक सप्ताह का समय लगाते हैं, कभी-कभी तो 15 दिन में रिपोर्ट देते हैं। इससे टीकाकरण प्रक्रिया बाधित होती है। इसे दूर करने के लिए यह सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है।
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ऑनलाइन सुपरविजन चेकलिस्ट सॉफ्टवेयर
स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार किए गए सॉफ्टवेयर का नाम है, आनलाइन सुपरविजन चेकलिस्ट सॉफ्टवेयर। इसमें ऑन द स्पॉट रियल टाइम रिपोर्टिंग भेजनी होगी, यानि टीकाकरण शिविर से ही रिपोर्ट भेजनी होगी। सीएमओ ऑफिस से इसकी मॉनिटरिंग होगी। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि शिविर की लोकेशन, समय, वैक्सीन की स्थिति और बच्चों का ब्योरा आदि की जानकारी सॉफ्टवेयर में अपडेट करनी होगी। इसमें इंटरनेट की कनेक्टिविटी होने का बहाना भी नहीं रहेगा, इसे ऑफलाइन भी कर सकेंगे। इंटरनेट की कनेक्टिविटी मिलते ही यह खुद ऑनलाइन अपडेट हो जाएगा।

16 जुलाई से चलेगा स्पेशल अभियान
एसीएमओ डॉ. विश्वास चौधरी ने बताया कि डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और स्वास्थ्य विभाग 16 जुलाई से चार-चार दिन के टीकाकरण को लेकर विशेष अभियान चलाएगा। यह अभियान चार माह तक चलेगा। इसमें टीकाकरण से छूटे बच्चों का सर्वे कराया जाएगा और फिर इनका टीकाकरण होगा। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों केलिए स्वास्थ्य विभाग ने व्हाट्स एप ग्रुप पर क्विज शुरू किया है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और टीकाकरण के प्रति उनकी जानकारी बढ़े।

भ्रांतियां होंगी दूर तो बच्चों को सेहत मिलेगी भरपूर
यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. भृगु कपूरिया का कहना है कि टीकाकरण से जुड़ी भ्रांतियों के कारण परिजन अपने बच्चों को टीके नहीं लगवाते हैं। टीका लगने केहल्के साइड इफेक्ट हो सकते हैं जैसे बुखार, शरीर में दर्द, सूजन, सिरदर्द, अस्थायी दर्द या जकड़न। यह समझना चाहिए कि टीकों से होने वाली यह परेशानियां मामूली हैं, अगर इन्हें नहीं लगवाएंगे तो जोखिम ज्यादा है। भारत वैक्सीन निर्माण करने में पहले नंबर पर है।
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जागरूकता की कमी की वजह नहीं लगवाते टीके
भारत में करीब 35 प्रतिशत लोग जागरूकता की वजह से टीके नहीं लगवाते हैं। इनके अलावा 26 प्रतिशत बुखार या हल्की सूजन आदि आने की वजह से नहीं लगवाते। विरोध करने वाले सिर्फ आठ प्रतिशत हैं। लिहाजा जागरूकता की ज्यादा जरूरत है। साल 2005 में भारत में टीकाकरण 44 प्रतिशत था और 2015 में 65 प्रतिशत।
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