मुखबिर योजना बेअसर, सक्रिय होंगे अफसर
मेरठ। मुखबिर योजना बेअसर साबित हो रही है। मेरठ का लिंगानुपात प्रदेश के कुल लिंगानुपात से कम है, जो कि चिंता का विषय है। लिंगानुपात बढ़ाने के लिए अधिकारी फिर से सक्रिय होने का दावा कर रहे हैं।
प्रदेश में लिंगानुपात 903 है, यानी एक हजार पुरुषों पर 903 महिलाएं। वहीं, मेरठ में यह अनुपात 885 है। इसे सुधारने की गंभीरता से कोशिश नहीं की जा रही है। यह हालात तब हैं जबकि मुखबिर योजना के अंतर्गत सफल डिक्वाय ऑपरेशन करने पर मुखबिर को 60 हजार रुपये, मिथ्या ग्राहक को एक लाख रुपये और मिथ्या ग्राहक सहायक को 40 हजार रुपये धनराशि पुरस्कार के तौर पर दी जाती है।
दूसरी तरफ, जिले में भ्रूण लिंग परीक्षण के खेल पर स्वास्थ्य विभाग अंकुश नहीं लगा पाया है, जबकि हरियाणा की टीम कई बार बड़ी छापामारी कर चुकी है। जो एक-दो बार इस तरह के मामले पकड़ में आए, वह भी हरियाणा की टीम के जरिए ही पकड़े गए हैं। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत गठित जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कमेटी कोई बड़ा खुलासा नहीं कर पाई है। हालांकि हर साल कई बार डाइग्नोस्टिक सेंटरों के निरीक्षण के लिए अभियान चलाया जाता है। लोग आरोप लगाते हैं कि स्थानीय स्तर पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि लिंगानुपात बढ़ाने के लिए समाज में जागरूकता की जरूरत है। इसके लिए कार्यशाला आयोजित होगी। छापामारी भी की जाएगी।
खास बातें:
मेरठ का लिंगानुपात 885, प्रदेश में 903