शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों के हाथ लगी 92 दुकान
मेरठ। शराब सिंडिकेट को भले ही शासन ने तोड़ने का प्रयास किया हो, लेकिन उसके बड़े कर्मचारियों ने अपना पूल बनाकर अपने रोजगार को न केवल बरकरार रखा, बल्कि अब देशी शराब की थोक बिक्री की तरफ भी अपना मजबूत कदम बढ़ा दिया है। इस सिंडिकेट ने बड़ी संख्या में आवेदन कर अंग्रेजी, देशी शराब, बीयर और मॉडल शॉप की 92 दुकानों पर कब्जा किया। लाटरी में 307 दुकानों का आवंटन हुआ था।
नई आबकारी नीति के तहत सोमवार को शराब की दुकानों का ई लाटरी के माध्यम से आवंटन हुआ था। इस नई आबकारी नीति के लागू होने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी शराब सिंडिकेट के वरिष्ठ कर्मचारियों को थी, जिनका रोजगार ठप होने को था। ये कर्मचारी जिला स्तर पर पूरे शराब का कारोबार संभाले हुए थे। इनका काम शराब का स्टॉक पहुंचाना, रोजाना पैसों का कलेक्शन करना और बैंक में जमा करने के साथ शासन, प्रशासन के साथ विभागीय अधिकारियों के साथ तमाम स्थानीय समस्याओं को दूर करना था।
नई आबकारी नीति के बाद शराब की दुकानों का आवंटन आम आदमी के हाथ जाने से इन कर्मचारियों की नौकरी खतरे में आ गई थी। ऐसे में सभी ने मिलकर अपने रिश्तेदारों के साथ एक बड़ा पूल बनाया और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के साथ शराब की दुकान आवंटन प्रक्रिया में कूद गए। आबकारी सूत्रों के अनुसार इस पूल के लोगों को जनपद के सबसे ज्यादा बिक्री वाली दुकानों का पता था, ऐसे में इन्होंने अपने आवेदन में मुख्य रूप से उन्हीं दुकानों और मॉडल शॉप को रखा। इस पूल ने करीब एक हजार आवेदन किये। ताकि ई लाटरी में उनका भाग्य खुल सके। इस पूल की नीति कामयाब भी रही, क्योंकि एक अनुमानित आंकड़े के अनुसार शराब सिंडिकेट कर्मचारियों के इस पूल को जनपद में 92 अंग्रेजी, देशी व बीयर की दुकान व मॉडल शॉप हाथ लगी हैं।
खास बातें:
शराब सिंडिकेट के कर्मचारियों ने अपना पूल बना किया प्रभुत्व कायम