समितियों से नहीं, संघ से बैंक चेयरमैन पद की कवायद
मेरठ।
सहकारिता चुनावों में जिला सहकारी बैंक चेयरमैन पद की कवायद को लेकर घमासान चल रहा है। एक तरफ जहां भाजपाई खेमा किसी भी तरह चेयरमैन पद पर अपना कब्जा बनाने के लिए हर हथकंडा अपना रहा है, तो दूसरी तरफ सपाई चुनाव में सत्ता के दबाव का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन इन आरोपों के बीच भाजपाई भी दो खेमों में बंटकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। लेकिन नियमों को देखते हुए भाजपाई खेमा सहकारी समितियों के बजाए सहकारी संघों के माध्यम से जिला सहकारी बैंक चेयरमैन पद का रास्ता तय होता देख, संघ चुनाव की कवायद में जुटा हुआ है।
सहकारिता चुनाव में सहकारी समितियों का चुनाव निपट चुका है और सहकारी संघ का चुनाव भी दो दिन पूर्व लगभग पूरा हो चुका है। लेकिन सहकारी समितियों में जहां हल्की फुल्की खींचतान नजर आई, तो सहकारी संघ में यह खींचतान खुलकर सामने आई। इसमें भाजपाई खेमे ही आपस में जूझ गए। इस चुनाव में खींचतान के पीछे पूरी तरह बैंक चेयरमैन पद की कवायद होना बताया जा रहा है।
नियमों के आगे ढेर हो सकते हैं समितियों के प्रतिनिधि
सहकारी समिति नियमावली के अनुसार जिन समितियों की वसूली 75 प्रतिशत से कम है, उनके प्रतिनिधियों को चुनाव में प्रतिभाग करने से रोका जा सकता है। ऋण माफी योजना की गफलत के चलते मेरठ की अधिकांश सहकारी समितियां इस लक्ष्य को नहीं छू पाई हैं। ऐसे में यदि विपक्षी खेमा इस नियम को लेकर अटक गया तो जिला सहकारी बैंक चेयरमैन पद का चुनाव सहकारी संघ प्रतिनिधियों के ऊपर निर्भर हो जाएगा। इसलिए सभी की कवायद अब संघ में अपने-अपने प्रतिनिधियों को निर्वाचित कराने की चल रही है।
संघ चुनाव में रखे नियम ताक पर
सहकारी संघ चुनाव में प्रतिनिधि नामित नहीं हो सकते हैं। लेकिन पांचलीखुर्द सहकारी संघ का चुनाव सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया है। यहां पर भाजपाई ही आपस में भिड़ गये हैं। सोमवार को भाजपा नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख योगेंद्र किठौली ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। जिस पर उनके निर्देश पर योगेंद्र किठौली ने सीडीओ आर्यका अखौरी से मिलकर अपना पक्ष रखा। योगेंद्र किठौली का कहना है कि चुनाव अधिकारी ने पूरी तरह दूसरे पक्ष के दबाव में अवैधानिक रूप से काम किया। उन्होंने इसके साक्ष्य भी दिखाए। जिसमें सहायक निर्वाचन अधिकारी का एक पत्र भी सौंपा, जिसमें लिखा गया है कि चुनाव अधिकारी पूरे समय निर्वाचन केंद्र पर नहीं बैठे। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा 8 फरवरी को 10 व्यक्तियों के नामांकन हेतु शुल्क जमा करते हुए सूची दी गई थी। लेकिन निर्वाचन अधिकारी इसके बाद 17 फरवरी को आए और अंतिम सूची चस्पा कर दी। यही नहीं जो लोग समितियों से निर्वाचित होकर आये थे, उनके नाम काट दिए गए और फर्जी तरीके से नियम विरुद्ध नामित लोगों को शामिल कर दिया गया। इस मामले में सीडीओ ने जांच कर कार्रवाई की बात कही है।
अप्रैल में होगा बैंक चेयरमैन का चुनाव
जिला सहकारी बैंक चेयरमैन को लेकर लगातार कवायद हो रही है। सहकारी समितियों और संघ के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र से डायरेक्टर चुनेंगे और ये निर्वाचित डायरेक्टर जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन का चुनाव करेंगे। ऐसे में अपने पक्ष के डायरेक्टर निर्वाचित कराने की चल रही कवायद में इस समय सबसे पहले बैंक प्रतिनिधियों को लेकर ही खींचतान हो रही है। जबकि चेयरमैन का चुनाव मार्च के अंतिम या अप्रैल के प्रथम सप्ताह में होने की बात कही जा रही है।