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खेती की जमीन पर होटल निर्माण का नक्शा पास

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खेती की जमीन पर होटल का नक्शा पास
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एनएच-58 पर बनाये जा रहे एक होटल को लेकर उठे सवाल
होटल की जमीन में कुछ हिस्सा ग्राम समाज की जमीन का भी कब्जाया
नक्शा पास कराने के बाद अब बैंक लोन लेने के लिए अब दिया आबादी में दर्ज करने का प्रार्थना पत्र


मेरठ।
एनएच- 58 पर ग्राम डूंगरावली के पास एक बडे़ होटल का निर्माण शुरू हुआ है। नियमों के विपरीत जिस तरह इस होटल का निर्माण शुरू हो रहा है और निर्माण की बाबत अधिकारियों पर भी दबाव बनाने का प्रयास हो रहा है, उसे लेकर सवाल उठने लगे हैं।

यहां से खुलना शुरू हुआ मामला
ग्राम डूंगरावली के मजरे में एक एनएच-58 पर एक होटल निर्माण हो रहा है। इसके निर्माण में शहर के तीन लोग जुड़े हैं। इन तीनाें की तरफ से एक प्रार्थना पत्र पिछले दिनों मंडलायुक्त को दिया गया, जिसमें एसडीएम सदर की शिकायत की थी, कि वह उनके प्रार्थना पत्र पर धारा 80 के तहत चार खसरा नंबरों की जमीन को आबादी में दर्ज नहीं कर रही हैं। इस कारण उनका नुकसान हो रहा है, क्योंकि नक्शा स्वीकृति के बाद निर्माण हेतु उन्हें तैयार बजट का 75 प्रतिशत बैंक से ऋण लेना है। लेकिन जमीन को बिना आबादी में दर्ज कराये ऋण स्वीकृत नहीं हो रहा है।
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शिकायती पत्र पर उठे सवाल
एसडीएम के खिलाफ आयी इस शिकायत पर जब कलक्ट्रेट और तहसील के कर्मचारियों और अधिकारियों ने नजर डाली तो सवाल उठना शुरू हो गये। क्योंकि होटल निर्माण करने वाले शहर के चर्चित लोग है। इस मामले में जब पड़ताल की गयी तो पता चला कि जिस जमीन पर होटल बनाया जा रहा है, उसमें चार खसरा नंबर है। जिसमें कुल 8719 वर्ग मीटर जमीन पर होटल निर्माण होना है इसमें एक खसरा नंबर की 2722 वर्ग मीटर जमीन होटल निर्माण में ली गयी है। यह खसरा नंबर बंजर में दर्ज है, जो ग्राम समाज की भूमि होती है।

जमीन सहित नक्शे को लेकर उठा सवाल
सबसे पहला सवाल यह उठ रहा है कि जब जमीन आबादी में दर्ज ही नही है तो एमडीए ने नक्शा कैसे स्वीकृत कर दिया। इसके अलावा दूसरा सवाल यह उठ रहा है कि जिस जमीन में होटल निर्माण हो रहा है, उसके एक चौथाई हिस्से की जमीन बंजर में दर्ज है, जो ग्राम समाज की है। ऐसे में जब धारा 80 के तहत आबादी में दर्ज होने का आवेदन आया और उस पर लेखपाल की रिपोर्ट लगी तो इस बंजर भूमि को क्यों नहीं रिपोर्ट में शामिल कर आपत्ति दर्ज करायी गयी। यदि जमीन किसी को पट्टे पर दी गयी थी और उसने बेची है तो उसका भी हवाला रिपोर्ट में होना चाहिए था, लेकिन सारे तथ्य छिपा दिये गये और रिपोर्ट में पता नहीं चल पा रहा है कि जमीन किसके पास थी और कहां से खरीदी गयी। वहीं दूसरा बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जमीन आबादी में दर्ज ही नहीं थी तो नक्शा कैसे पास कर दिया गया।

एसडीएम ने लगायी 12 बिंदुओं पर आपत्ति
धारा 80 के तहत आबादी में दर्ज कराने के लिए आयी लेखपाल की रिपोर्ट पर एसडीएम ने 12 बिंदुओं के साथ आपत्ति लगाते हुए उन पर आख्या मांगी है। इसमें सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर दर्ज की है कि संबंधित क्षेत्र के सर्किल रेट के आधार पर जमीन की कीमत का खुलासा नहीं किया गया है। क्योंकि आबादी में दर्ज कराने का आदेश पारित करने से पहले सर्किल रेट का एक प्रतिशत धनराशि जमा करना होगा।
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प्रभावशाली लोगों का लग रहा पैसा
चर्चा है कि इस होटल में प्रभावशाली लोगों का पैसा लग रहा है। जिस कारण जमीन को आबादी में दर्ज कराने से पहले नक्शा स्वीकृत कराने और अब आबादी में दर्ज कराने को लेकर दबाव की रणनीति चल रही है।

वर्जन....
मामला मेरे संज्ञान में नही है। अब इस मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जमीन बंजर में दर्ज है तो नियमानुसार कार्रवाई तय की जायेगी।
एसपी पटेल, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
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