हापुड़ अड्डे की जमीन पर कार्रवाई करें डीएम
मेरठ।
हापुड़ अड्डा स्थित खसरा नंबर 4632 का मामला जिला प्रशासन के गले की फांस बन गया है। एक तरफ जहां इस सरकारी जमीन पर कब्जे पर कार्रवाई को राजनीतिक दबाव में लटकाया जा रहा है। वहीं हाईकोर्ट का दबाव जिला प्रशासन पर लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इस मामले में हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी को मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया है।
ये है पूरा मामला
अमर उजाला ने पांच माह पूर्व हापुड़ अड्डा स्थित खसरा नंबर 4632 का मामला उठाया था। नजूल की इस जमीन में एक बिल्डर ने अवैध रूप से 72 दुकानों के कांप्लेक्स का निर्माण कर दिया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद मंडलायुक्त ने जांच कराई तो पता चला कि जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर बिना नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण हुआ है। इस पर इन दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया था। लेकिन जांच रिपोर्ट में पता चला कि इस जमीन का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है, जिस पर 93 अन्य कब्जेदार हैं जो लंबे समय से चले आ रहे हैं। इस पर नजूल प्रभारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की तरफ से सभी 93 कब्जेदारों को नोटिस जारी कर उनके मालिकाना हक के साक्ष्य सहित जवाब मांगे गए। लेकिन अधिकांश कब्जेदार जवाब नहीं दे पाए और जिन लोगों ने जवाब दिया वह संतोषजनक नहीं था। इस मामले में कुछ कब्जेदार हाईकोर्ट भी गए। कोर्ट ने जिला प्रशासन को इस मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया।
इसके बाद इस मामले में समाजसेवी सचिन सैनी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की, जिस पर कोर्ट ने जिलाधिकारी को एक माह में मामले का निस्तारण करने का निर्देश दिया। लेकिन जिला प्रशासन ने सिर्फ कोर्ट के अनुपालन में एक माह पूरा होते ही इस मामले को पीपीएक्ट के तहत वाद के रूप में एसीएम सिविल लाइन कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। अब सभी कब्जेदारों पर मुकदमा चलेगा, जिसमें सुनवाई के बाद जमीन के विवाद का निस्तारण होगा।
वहीं दूसरी तरफ सरकारी जमीन कब्जामुक्त न होने पर सचिन सैनी ने हाईकोर्ट में कोर्ट की अवमानना का वाद दायर कर दिया। जिस पर कोर्ट ने 21 नवंबर को आदेश जारी करते हुए आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी को इस मामले का निस्तारण करने का आदेश जारी किया है।
खास बात
नजूल घोषित होने के बावजूद कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश