अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
साइकिल ट्रैक में व्यवधान बनी विद्युत लाइन को शिफ्ट करने के नाम पर एमडीए अधिकारियों ने बड़ा घोटाला किया। काम हुए बिना ही डेढ़ करोड़ का भुगतान कर दिया गया। दोगुनी कीमत पर वायर खरीदा और बिना सत्यापन 18 लाख 80 हजार रुपये सुपरविजन चार्ज के रूप में पीवीवीएनएल को दे दिए। इन सबका खुलासा कमिश्नर की जांच में हुआ। इसके बाद कमिश्नर ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार के आरोपी तीन अभियंताओं को अपने कार्यालय में बुलाकर गिरफ्तार करा दिया। कमिश्नर की इस कार्रवाई से एमडीए समेत सभी विभागों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं तत्कालीन एमडीए वीसी समेत 12 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
सूरजकुंड तिराहे से मंगलपांडे नगर तक आबू नाले के किनारे डबल सर्किट 33 केवी लाइन को साइकिल ट्रैक होने के कारण शिफ्ट करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। कमिश्नर के मुताबिक 23 सितंबर 2015 को इसके लिए निविदाएं आमंत्रित की गई। इसमें 07 निविदा दाताओं द्वारा प्रतिभाग किया गया। इसमें ए प्लस श्रेणी के ठेकेदरों की अर्हता लगाई गई थी। बाद में सेटिंग कर आरसीसी डेवलेपर्स को 0.02 प्रतिशत निमभन दर पर यह ठेका दे दिया गया। कुल 4282 रुपये वर्ग मीटर केबल वायर का रेट तय कर कुटेशन तैयार की गई। इस बाबत कमिश्नर ने जांच कराई तो पता चला कि रेट वैसे तो 1840 रुपये मीटर है, पर यदि कांट्रेक्टर प्राफिट, कार्टेज लोडिंग समेत सभी कर और चार्ज भी जोेड़ें तो भी इस वायर की कीमत 2685 रुपये से ज्यादा नहीं है। इतना ही नहीं काम का सत्यापन पीवीवीएनएल अधिकारियों से कराए बिना ही 18,80,452 रुपये का भुगतान पीवीवीएनएल को सुपरविजन चार्ज के रूप में कर दिया गया, जबकि कार्य मौके पर हुआ ही नहीं है।
ऐसे किया घोटाला
जांच में सामने आया कि मीटर वायर की आवश्यकता कुल 4324 मीटर की थी, लेकिन ठेकेदार को भुगतान 4900 मीटर वायर का किया गया। आरटीजीएस के माध्यम से तीन अगस्त 2016 को एक करोड़ 45 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। खेल में स्पष्ट है कि 1.45 करोड़ रुपये का तो सीधा गबन किया गया। इसके अलावा आयकर, वैट एवं सेस के रूप में कुल 11,06,877 रुपये का भुगतान कर प्राधिकरण को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है । आयुक्त के मुताबिक अवस्थापना निधि से प्रश्नगत कार्य को कराने का अनुमोदन न होने के बाद भी इस काम को बाह्य विकास निधि के 2,73,17,750 करोड़ रुपये से कराने की प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृति ही तत्कालीन उपाध्यक्ष, मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा गलत नीयत से कई।
अभियंताओं को ठीक 10 बजे करा दिया गिरफ्तार
कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने इस प्रकरण में लिप्त एक्सईएन एपी सिंह, एई सच्चिदानंद मिश्र तथा जेई रविंद्र सिंह को अपने कार्यालय बुलाया। पहले उन्हाेंने पूछताछ की और फिर थाना सिविल लाइन पुलिस को बुलाकर तीनों को गिरफ्तार करा दिया। इस बाबत एमडीए (विद्युत यांत्रिक) अधिशासी अभियंता अजय कुमार सिंह की तरफ से थाना सिविल लाइन में तत्कालीन उपाध्यक्ष, तत्कालीन सचिव, तत्कालीन मुख्य अभियंता एससी मिश्रा, अधीक्षण अभियंता शबीह हैदर, अधिशासी अभियंता एपी सिंह, सहायक अभियंता अमर प्रताप सिंह, एसएन मिश्र, सहायक अभियंता (विद्युत) एपी सिंह तथा अवर अभियंता अनिल कुमार मेहरा, रविंद्र सिंह एवं चाणक्य जोशी, ठेकेदार मै. आरसी डेवलेपर्स के विरुद्ध षडयंत्र कर बदनीयती से फर्जी बिल तैयार कर शासकीय धन का गबन करने एवं मेरठ विकास प्राधिकरण को आर्थिक क्षति पहुंचाने केआरोप में धारा 409, 420, 120 बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 में एफआईआर कराई गई है।
खास बातें
- साइकिल ट्रैक में आ रही लाइन को शिफ्ट कराने और वायर घोटाले का है आरोप
- कमिश्नर ने बैठक में बुलाकर अभियंताओं को पुलिस को सौंपा
- एमडीए समेत सभी विभागों में इस कार्रवाई से मचा हड़कंप