भाजपा को झटका, नहीं पंजीकृत होंगी नई समितियां
अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक सहकारिता ने जारी किए आदेश
भाजपाइयों ने सहकारी चुनावों के लिए शुरू कर दिए थे नई समितियों के आवेदन
मेरठ।
सहकारी चुनावों की तैयारी में जुटे भाजपाइयों को शासन के आदेश ने झटका दिया है। अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक सहकारिता ने 13 साल पुराने आदेश का हवाला देते हुए विशेष श्रेणी की विपणन सहकारी समितियों के हो रहे पंजीकरण पर आपत्ति जताते हुए तत्काल प्रभाव से इस पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
सहकारिता चुनावों को लेकर भाजपा तैयारी कर रही है। इसके लिए जिला स्तर पर सहकारिता प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं। जो आने वाले चुनावों की तैयारी के साथ प्रत्याशी भी तय कराएंगे। सहकारी चुनावों में सहकारी समितियों के डेलीगेट चुनाव से लेकर इसके बाद सहकारी बैंक चेयरमैन के चुनाव होते हैं। मेरठ में इस समय करीब 370 सहकारी समितियां हैं, जिनमें किसान सेवा सहकारी समिति, साधन सेवा सहकारी समिति, क्रय विक्रय सहकारी समिति, वेतन भोगी समिति, सहकारी संघ और उपभोक्ता सहकारी संघ आते हैं। इनमें 250 से 4000 तक सदस्य होते हैं। ये सदस्य अपनी अपनी समितियों में चुनाव के जरिये डेलीगेट चुनते हैं।
इन निर्वाचित होने वाले डेलीगेट की संख्या हर समिति में अलग-अलग होती है। ये डेलीगेट सहकारी बैंक डायरेक्टर के होने वाले चुनाव में वोटर होते हैं और डायरेक्टर का चुनाव भी निर्वाचित डेलीगेट ही लड़ सकता है। मेरठ में वर्तमान में बैंक डायरेक्टर के 13 पद हैं। ऐसे में सहकारी समितियों का परिसीमन कर उनके ऊपर एक-एक डायरेक्टर का निर्वाचन क्षेत्र तैयार कर दिया जाता है। निर्वाचित होकर आने वाले डायरेक्टरों में से बैंक चेयरमैन का चुनाव होता है।
भाजपा ने सहकारी बैंक पर कब्जे की रणनीति तैयार की है। भाजपा सहित सहकारी बैंक सूत्रों के अनुसार पिछले डेढ़ माह से सहकारी समितियां तैयार कर उनके पंजीकरण की कवायद चल रही है। जिसमें करीब डेढ़ सौ समितियों को अलग-अलग डायरेक्टर निर्वाचन क्षेत्रों से पंजीकरण के लिए दिया हुआ है। ताकि ज्यादा से ज्यादा अपने डायरेक्टर निर्वाचित कराकर आसानी से चेयरमैन पद पाया जा सके। इस मामले में प्रदेश भर से सहकारिता विभाग को विपक्षियों ने शिकायत भेजी।
इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक सहकारिता ने सभी क्षेत्रीय उप निबंधकों को आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि 24 जनवरी 2004 को आदेश जारी हुआ था कि अग्रिम आदेश तक विशेष श्रेणी की विपणन सहकारी समितियों का पंजीकरण न किया जाये। बावजूद इसके कई जगह पंजीकरण की प्रक्रिया होने की शिकायतें मिल रही हैं, जो शासन के आदेश का उल्लंघन है। इसलिए तत्काल पंजीकरण की प्रक्रिया रोक दी जाए। इस आदेश के बाद भाजपा की तैयारियों को झटका लगा है।