20 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा घायल, अस्पताल में हो गई मौत
आठ अस्पतालों में नहीं ब्लड, मौत होने पर परिजनों ने की अस्पताल में तोड़फोड़
मंगलवार रात मवाना रोड पर सैनी के पास हुआ हादसा, किसी ने नहीं रोका वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
गंगानगर/मेरठ। मवाना रोड पर सैनी में पुल के पास मंगलवार रात हुए एक्सीडेंट के बाद घायल करीब 20 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा। वाहन निकलते रहे लेकिन कि सी ने मदद नहीं की। जब तक कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना देकर घायल को अस्पताल पहुंचाया, तब तक काफी खून बह चुका था। बुधवार दोपहर रक्षापुरम स्थित निजी अस्पताल में मौत होने के बाद भीड़ आक्रोशित हो गई ओर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर तोड़फोड़ कर दी।
इंचौली के धनपुर निवासी विकास यादव (22) पुत्र मांगेराम एक पत्रिका के लिए काम करता था। विकास तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। पिता शुगर मिल में कार्यरत हैं। मंगलवार रात साढ़े 12 बजे विकास मेरठ से अपने घर जा रहा था। सैनी गांव में पुल के निकट किसी वाहन ने विकास की बाइक में टक्कर मार दी। विकास के पैरों में गंभीर चोट लगी। इस दौरान सड़क पर खोई बिखरी हुई पड़ी थी और घायल बीच सड़क पर तड़प रहा था। बाइक का अगला पहिया और मोबाइल सड़क पर अलग पड़ा हुआ था। बाइक क्षतिग्रस्त हुई तो पेट्रोल भी सड़क पर बिखरा हुआ था। वहां से वाहन आ जा रहे थे। एक ट्रक चालक ने घायल को देखकर बीच सड़क पर ही ट्रक रोक दिया, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी। 108 को भी सूचना दी गई, लेकिन काफी समय तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। कोई भी घायल को अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ और लोग वहीं खड़े कॉल करते रहे। काफी देर बाद इंचौली पुलिस पहुंची और जीप से विकास को रक्षापुरम के एप्सनोवा अस्पताल में भर्ती कराया।
रात दो बजे परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। सुबह करीब साढ़े आठ बजे डॉक्टरों ने परिजनों से युवक को कहीं और ले जाने को कह दिया। इसी दौरान अस्पताल में ही विकास ने दम तोड़ दिया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। आईसीयू के दरवाजों के शीशे तोड़ दिए। सूचना पर गंगानगर पुलिस अस्पताल पहुंची, लेकिन परिजन शांत नहीं हुए। हंगामा बढ़ने पर भावनपुर और इंचौली पुलिस भी पहुंच गई। बाद में सीओ सदर देहात अखिलेश भदौरिया ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को शांत किया। इंचौली पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बुधवार शाम को विकास का गांव धनपुर में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इंचौली एसओ मनोज शर्मा ने बताया कि सड़क दुर्घटना की तहरीर दी गई है।
पहले इलाज नहीं मिला और फिर ब्लड
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल वालों ने रात तीन बजे बी पॉजिटिव ब्लड का इंतजाम करने को कहा था। आठ अस्पतालों में धक्के खाने के बाद जिला अस्पताल में जाकर ब्लड मिला। सुबह सात बजे ब्लड लाकर दिया गया। साढ़े सात बजे तक भी अस्पताल वाले विकास की हालत खतरे से बाहर बता रहे थे। अचानक आठ बजे कह दिया कि हालत गंभीर है, कहीं और ले जाओ। इस दौरान डॉक्टरों पर देरी से पहुंचने का आरोप लगाया। परिजनों का आरोप है कि इससे पहले वार्ड ब्वॉय और अन्य कर्मी ही आईसीयू में विकास की देखभाल करते रहे। वहीं एप्सनोवा अस्पताल के एमडी डा. नितिन मलिक का कहना था कि कोई लापरवाही नहीं की गई है, मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। अस्पताल के वार्ड ब्वॉय के साथ बेवजह मारपीट और तोड़फोड़ की गई है।