शब ए बरात के अवसर पर अल्लाह के बंदों ने रात इबादत में गुजारी। वहीं, कस्बे में जलसे का आयोजन किया गया। कुछ लोग इसमें शामिल हुए तो कई ने कब्रिस्तान पहुंचकर अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाया।
शब ए बरात यानी बख्शीश की रात में अल्लाह के बंदे इबादत करते हैं तथा मगफिरत की दुआ की जाती है। कहा जाता है कि इस रात में अल्लाह तीसरे आसमान पर आकर अपने बंदों से रात में इबादत करने वालों से पूछता है कि कोई है मगफिरत का तलबगार। है कोई परेशान हाल जिसकी परेशानियों को दूर किया जाए। है कोई मांगने वाला जिसकी दुआ कुबूल की जाए। इबादत का सिलसिला सुबह फज्र की नमाज तक चलता रहा। कस्बे में शब ए बरात के मौके पर जलसे का भी आयोजन किया गया। जिसमें उलमाओं ने हदीस के हवाले से बताया कि शब ए बरात पर अपने गुनाहों से तौबा करने और कमजोरों की मदद करने के लिए परवरदिगार ने यह रात तोहफे में दी है। इस रात में इबादत करने से गुनहगारों की बख्श की जाती है। इस रात में इबादत करने वाले मोमिन का रिजक बढ़ा दिया जाता है। रात में इबादत के बाद मांगने से कर्ज अदायगी जेब से की जाती है। आज हम अल्लाह की रजा को छोड़ कर इबादत से दूर होकर दुनिया की दौलत कमाने में मशरूफ हैं। दुनिया फानी है एकदिन फना हो जाएगी। असल जिंदगी तो आखरत की है जो मरने के बाद काम आएगी। दुनिया में रहकर अच्छे आमाल अच्छे काम करने वाला ही इंसान आखरत में सुकून की जिंदगी गुजारेगा। यदि इस दुनिया में रहकर अच्छे काम नहीं किए तो मरने के बाद इंसान कयामत तक खसारे और नुकसान में रहेगा। दुनिया में रहकर अल्लाह की रजा अल्लाह की बंदगी के साथ ही जिंदगी गुजारें।