गढ़वाल राइफल्स ने धूमधाम से मनाई 34वीं वर्षगांठ, वीर नारियों को किया सम्मानित
पाइप बैंड की धुन से शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बटालियन के प्रथम कमान अधिकारी ने बढ़ाया उत्साह
मेरठ। शेर की दहाड़ और पहाड़ियों पर मिनटों में चढ़कर दुश्मन को चित करने की महारत हासिल करने वाली सेना की 18 गढ़वाल राइफल्स ने सोमवार को 34वीं वर्षगांठ मनाई। कैंट स्थित बटालियन स्थल पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बटालियन के प्रथम कमान अधिकारी रिटायर्ड कर्नल जेके शर्मा, युद्ध सेवा मेडल मौजूद रहे। गढ़वाल राइफल्स के स्लोगन ‘जय बद्री विशाल’ के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
सेवानिवृत्त और सेवारत अधिकारियों ने जवानों में जोश भरा। पाइप बैंड ने अपनी धुन से शहीदों को सलामी दी। इस मौके पर सलामी देने वाले जवानों और पाइप बैंड जवानों को कर्नल जेके शर्मा ने पुरस्कार दिए। इसके बाद पूर्व सैनिकों ने वीरगाथाएं सुनाकर अपने विचार व्यक्त किए। इस गढ़वाल राइफल्स की स्थापना 11 फरवरी 1985 को न्यू चैपल कैंप कोटद्वारा में हुई थी। इस मौके पर बटालियन की वीर नारियों को सम्मानित किया गया। कई वीर नारियों की आंखें नम हो गईं।
प्रमुख ऑपरेशन में रही शामिल
बटालियन बहुत कम उम्र मेें ही सेना के प्रमुख ऑपरेशन पवन और विजय को कर चुकी है। इन्हीं उत्कृष्ट कार्यों के लिए बटालियन को कई महत्वपूर्ण अवार्ड से नवाजा जा चुका है। बटालियन को द्रास सेक्टर में किए गए कार्यों के लिए ‘बैटल ऑनर’, कारगिल के लिए ‘थियेटर ऑनर’ और 15 जनवरी 2000 में हुए ऑपरेशन विजय के लिए सेना अध्यक्ष यूनिट प्रशंसा पत्र दिया जा चुका है।
शांति सेना कहलाई गई
साल-2013 में बटालियन को भारतीय सेना की तरफ से शांति सेना के रूप में यूएन मिशन कांगो में जाने का मौका मिला। यहां बटालियन ने काफी सराहनीय कार्य किए। इसके लिए 26 जनवरी 2015 को मोनस्को फोर्स कमांडर यूनिट साईटेशन, 27 मोनस्को फोर्स कमांडर प्रशंसा पत्र और 42 मोनस्को नार्थ किबू ब्रिगेड कमांडर प्रशंसा पत्र से नवाजा गया।