निजीकरण के खिलाफ विद्युत कर्मियों ने बजाया बिगुल
मेरठ।
सरकार के पांच बड़े शहरों की बिजली का निजीकरण करने का विरोध होने लगा है। सोमवार को पश्चिमांचल के बिजली कर्मियों व अधिकारियों ने तीन घंटे कार्य बहिष्कार कर ऊर्जा भवन पर हंगामा काटा। कर्मचारियों ने कहा किसी भी सूरत में बिजली का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा।
प्रदेश कैबिनेट ने मेरठ सहित लखनऊ, मुरादाबाद, बनारस और इलाहाबाद की बिजली का निजीकरण करने के फैसले पर मुहर लगाई है। सरकार के इस फैसले का बिजली कर्मियों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया है। सोमवार को पीवीवीएनएल अधिकारियों व कर्मचारियों ने दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक तीन घंटे कार्य बहिष्कार किया और संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में इकट्ठा होकर ऊर्जा भवन पहुंचे।
संघर्ष समिति नेता आईपी सिंह ने कहा सरकार जिन महानगरों की बिजली का निजीकरण कर रही है वहां खराब स्थिति नहीं है। सरकार को अगर निजीकरण करना है तो देहात की बिजली का करे, जहां से सरकार को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। लेकिन निजी कंपनियों की निगाह उन शहरों की बिजली पर है जहां से मोटा राजस्व प्राप्त हो रहा है और बिजली ढांचे में भी कुछ खर्च नहीं करना पड़ेगा। समिति ने सीएम के नाम ज्ञापन भी भेजा। सभी कर्मचारियों ने आगामी 27 मार्च को पूर्ण हड़ताल करने का आह्वान किया है। इस मौके पर अधीक्षण अभियंता जेके सिंह, एके सिंह, संजय अग्रवाल, अधिशासी अभियंता राजेश शर्मा, मनीष गुप्ता, संजय शर्मा आदि के अलावा राजेश चौधरी, अजित सिंह, नीरज आर्य, सुरेश, जगपाल, मांगेराम, बिजेंद्र पहलवान, जतन पहलवान आदि मौजूद रहे।