भ्रष्टाचार में साथ नहीं, लेकिन कार्रवाई का तरीका रहा गलत
- कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने पत्रकार वार्ता में रखा अपना पक्ष
- कर्मचारी नेताओं ने कहा निजी कर्मचारी रखने में अधिकारी भी दोषी
- मंडलायुक्त ने अधिकारियों पर क्यों नहीं की अभी तक कार्रवाई
मेरठ।
तहसील सदर के तीन कर्मचारियों के खिलाफ मंडलायुक्त द्वारा करायी गयी कार्रवाई के बाद से कलक्ट्रेट कर्मचारी हड़ताल पर हैं। रविवार को हड़ताली कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने धरना स्थल पर पत्रकारों से वार्ता की। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वह भ्रष्टाचार में साथ नहीं है। लेकिन जिस तरह कार्रवाई हुई, उसका तरीका भी गलत है। निजी कर्मचारियों को रखना भ्रष्टाचार की श्रेणी में भी नहीं आता। जबकि निजी कर्मचारी जिन बड़े अधिकारियों की सहमति पर रखे गये थे, उनके खिलाफ आज तक कार्रवाई नहीं हुई है।
धरना स्थल पर उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रीयल कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा और महामंत्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि प्राइवेट कर्मचारी नायब तहसीलदार, तहसीलदार और एसडीएम आदि की स्वीकृति के बाद ही रखे जा सकते हैं। तहसील ही नहीं अन्य कार्यालयों में भी कर्मचारियों की कमी और काम ज्यादा होने के कारण निजी कर्मचारी तैनात हैं। निजी कर्मचारियों की तैनाती भ्रष्टाचार में नहीं आती है। इसके अलावा शासनादेश के अनुसार कर्मचारी के खिलाफ जांच कर विभागीय कार्रवाई तय की जाती है। किसी आपराधिक भूमिका में संलिप्त होने पर ही मुकदमा दर्ज होना चाहिए। लेकिन इन नियमों का पालन कार्रवाई में नहीं हुआ। इसके अलावा जिन अधिकारियों की सहमति से निजी कर्मचारी तैनात हुए, उन पर मंडलायुक्त ने आज तक कार्रवाई नहीं की, जिसका विरोध कर्मचारी संगठन कर रहे हैं।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि 21 अगस्त तक उनकी मांगों को नहीं माना गया तो प्रांतीय नेतृत्व की बैठक में तय होने वाले निर्णय के अनुसार आंदोलन किया जायेगा। इस दौरान प्रवीण जैन, ऋषि राज, शकील अहमद, राजेश शर्मा, गुलफाम, नागेश दत्त शर्मा आदि मौजूद रहे।