मेडिकल के 400 संविदा कर्मचारी हड़ताल पर, दिया धरना
मेरठ। तीन माह से सैलरी न मिलने से नाराज मेडिकल के करीब 400 संविदा कर्मचारियों (नर्सिंग स्टाफ, वार्ड ब्वाय और सफाई कर्मी) अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। मंगलवार को उन्होंने इमरजेंसी के सामने धरना प्रदर्शन किया। चेतावनी दी है कि जब तक सैलरी नहीं आएगी, हड़ताल जारी रहेगी।
कर्मचारियों ने बताया कि उनकी मांगें हैं कि उनका बकाया वेतन मिलना चाहिए। कुछ कर्मचारियों का साल 2017-18 का भी वेतन रुका हुआ है, उनका वह वह वेतन मिले और कुछ कर्मचारियों का निलंबन किया गया था, उसे वापस लिया जाए। इससे मेडिकल में अव्यवस्था हो गई है। सफाई व्यवस्था के अलावा वार्ड ब्वाय और नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर जाने से मरीजों के लिए असुविधा हो गई है। संयुक्त स्वास्थ्य संविदा कर्मचारी संघ के जिला महामंत्री चंद्रकिरण राजपूत ने बताया कि जब तक उनकी सैलरी नहीं मिलेगी, वह कार्य नहीं करेंगे। उनका पिछले तीन माह का वेतन रुका हुआ है। उन्होंने बताया कि करीब 40 कर्मचारियों का ही एक माह का वेतन आया है। जब तक सबका वेतन नहीं आएगा। कार्य नहीं होगा। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता से शिकायत कर चुकेहैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। धरना-प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष रेणु राना, प्रीति सक्सेना, सौरभ चौहान, रीता वर्मा, मेघना लोधी, विजय राजपूत, शैंकी त्यागी, राकेश जयसवाल, रिंकू, मनीष राठी, अनीता राणा, निधि एवं शिवकुमार आदि।
दो माह की सैलरी हुई है जारी, नर्सिंग कॉलेज से लगाया स्टाफ
इस संबंध में मेडिकल के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि अधिकांश कर्मचारियों की दो माह की सैलरी जारी हो चुकी है। इससे कर्मचारियों को भी अवगत करा दिया गया है। इसके बाद भी वे हड़ताल पर हैं। व्यवस्था बनाए रखने के लिए नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा स्थायी कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
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विधान परिषद में गूंजी मेडिकल की अव्यवस्था
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में फैली अव्यवस्था की गूंज मंगलवार को विधान परिषद में भी गूंजी। एमएलसी अतर सिंह राव ने यह मामला उठाया। उन्होंने प्रमुख सचिव (विधान परिषद) से कहा कि मेडिकल कॉलेज में गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को जान गंवानी पड़ रही है। जो चिकित्सक मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध हैं, उनका एक-दूसरे मेडिकल कॉलेजों में नियम विरुद्ध स्थानांतरण कर परेशान किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं। बीमार व्यक्तियों को प्राइवेट डॉक्टरों के पास इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यहां एंडोकाइनोलॉजी, मेटाबोलिक, नेफ्रोलॉजी, कॉर्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी विभागों में चिकित्सक नहीं हैं। करोड़ों रुपये से लगाई गई एमआरआई और सिटी स्कैन की मशीनें भी बंद पड़ी हैं। इलाज नहीं मिलने से जनता में काफी रोष है।