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40-50 फर्म, परिवार का हर सदस्य डायरेक्टर

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40-50 फर्म, परिवार का हर सदस्य डायरेक्टर
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मेरठ। परिवार की 40 से 50 अन्य कंपनियां भी बताई जा रही हैं। आयकर विभाग को सूचना मिली थी कि सराफा कारोबारी सोने की गिन्नी भी बनाता था। संपूर्ण आय-व्यय का ब्योरा प्राप्त करने के लिए टीम पेन ड्राइव की तलाश में जुटी रही। फर्म की कुल पूंजी 16 करोड़ रुपये बताई गई। पवन के पुत्र अजय जैन और राहुल जैन इसमें डायरेक्टर थे। 2016 में कामला चांदना नाम का एक और पार्टनर शामिल हो गया। परिवार के सभी सदस्य किसी न किसी कंपनी में डायरेक्टर बताए गए। ये कंपनियां सोना, हीरा, आभूषण समेत रियल एस्टेट सेक्टर में काम कर रही हैं। विभाग इन सभी सूचनाओं की जांच कर रहा है। टीम ने संपत्तियों के दस्तावेज, बिक्री-खरीद के आंकड़ों के साथ काले-सफेद धन का आंकलन किया है।
सोने के कारोबार का मूल्यांकन कठिन
सोने का कारोबार 70 प्रतिशत ब्लैक तो 30 प्रतिशत सफेद में किया जाता है। बड़ी संख्या में लोग काले धन को ठिकाने लगाने के लिए सोने में निवेश करते हैं। ऐसे में पैसा कहां से आया और कहां गया, यह जानना मुश्किल होता है।
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होगा। इन हालातों में किस व्यापारी के पास कितना पैसा गया है और किसका कितना बताया है, इसका ब्योरा निकाला जाएगा।
रियल एस्टेस्ट में लगे करोड़ों रुपये
रियल एस्टेट सेक्टर में पवन कुमार के करोड़ों रुपये लगे होने की शिकायत की गई थी। इस को लेकर छावनी बोर्ड से जुड़े वर्तमान व पूर्व पार्षदों के नाम चर्चा में हैं। बिजली बंबा बाईपास स्थित इंस्टीट्यूट समेत बॉम्बे बाजार, मॉल, पांडव नगर आदि क्षेत्रों में पवन की कई संपत्तियां बताई जा रही हैं। रियल एस्टेट सेक्टर में पवन के करीब 40 पार्टनर बताए गए। हर साइट में पवन का 90 प्रतिशत पैसा है, जबकि 10 प्रतिशत में अन्य पार्टनर हैं। इसी के चलते सिनेमा हॉल संचालक बिल्डर, डिफेंस कॉलोनी निवासी व्यापारी, छावनी के पूर्व पार्षद, गढ़ रोड निवासी कई बिल्डरों से उनका विवाद चल रहा है।
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कारोबारियों में बढ़ी बेचैनी
मेरठ। आयकर विभाग की कार्रवाई से अन्य सराफा कारोबारियों की बेचैनी बढ़ गई है। सदर से लेकर आबूलेन, आबू प्लाजा सहित शहर के मुख्य शहर सराफा बाजार में चर्चा रही कि अगला नंबर किसका होगा। कारोबारी सतर्क हो गए हैं। जिन कारोबारियों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया था, उन्होंने अपने-अपने सीए को फोन कर इसे फाइल करने के लिए कहा। कारोबारियों ने बताया कि पिछले साल आयकर विभाग की टीम सर्वे के लिए आई थी, सराफ पवन कुमार उसी समय से विभाग के रडार पर था और गुपचुप उसकी निगरानी की जा रही थी।
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