शहर में चार किमी की दूरी बचाने के लिए भारी वाहन शहर की सड़कों को तोड़ रहे हैं। कभी भी यह वाहन शहर में किसी के साथ भी हादसा कर सकते हैं। अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद मामला मंगलवार को पुलिस अफसरों तक पहुंचा तो एसपी सिटी ने सभी थाना प्रभारियों से रिपोर्ट मांग ली। पुलिस अफसरों का कहना है कि रात में किन स्थानों से वाहनों को निकाला जाये, इस पर भी यातायात पुलिस से पूरा प्लान मांगा गया है।
महानगर की आंतरिक सड़कें 40 फीट तक चौड़ी होती हैं। इन सड़कों को बनाते समय डैंस के नीचे की परत भी हल्की रखी जाती है। अगर इन सड़कों पर भारी वाहन दौड़ेंगे तो किसी भी कीमत पर पांच साल सड़क नहीं चल सकती है। प्रशासनिक अफसर भी मानते हैं कि शहर की हल्की सड़कों पर भारी वाहन नहीं निकलने चाहिए।
पीडब्लूडी के मानक के अनुरूप भारी वाहनों के लिए 60 फीट या इससे अधिक चौड़ा मार्ग होना चाहिए। मास्टर प्लान में यही मानक निश्चित है। हापुड़ रोड से जिन वाहनों को दिल्ली रोड पर आना है वे वाहन बिजली बंबा चौकी से बिजली बंबा बाईपास के रास्ते निकलें। इसके अलावा टीपीनगर में वाहनों के लिए हापुड़ अड्डा चौराहे से बेगमुपल के रास्ते दिल्ली रोड का मेन रूट निर्धारित है। चार किमी की दूरी बचाने के लिए शहर की सड़कों को भारी वाहन तोड़ रहे हैं।
हादसों का भी रहता है डर:
रात में जिन स्थानों से भारी वाहन निकलते हैं, वहां हादसे होने का भी खतरा बना रहता है। कभी भी कोई भी भारी वाहन या तो पलट सकता है या अनियंत्रित होकर किसी भी मकान में घुस सकता है। पांच दिन पहले जिलाधिकारी आवास के पास एक ट्रक डिवाइडर से टकरा गया था। दो दिन तक ट्रक सड़क पर ही खड़ा रहा, लेकिन थाना पुलिस ने कोई कार्रवाई करने की नहीं सोची।
ये मार्ग हैं भारी वाहनों के लिए विकल्प
- दिल्ली रोड से हापुड़ रोड, गढ़ रोड जाने वाले वाहन बिजली बंबा बाईपास से होकर गुजरने चाहिए,
- दिल्ली रोड से मवाना रोड और किला रोड़ जाने वाले वाहन बेगमपुल से जीरोमाइल के रास्ते कमिश्नरी आवास चौराहा पहुंच सकते हैं।