मेरठ। बढ़ते तनाव के चलते मेरठ में एक साल 388 लोगों ने आत्महत्या की है। इनमें से अधिकांश मामले गृह कलेश के हैं। वहीं लॉकडाउन के चलते आर्थिक तंगी और भूखमरी के कारण भी खुदकुशी के मामलों का ग्राफ जिले में बढ़ा है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मेरठ के देहात क्षेत्र में जहां अगस्त 2019 से अगस्त 2020 के बीच 238 लोगों ने जान दे दी वहीं शहर में भी 150 लोगों ने मौत को गले लगाया। हालांकि आत्महत्या के अधिकांश मामलों में लोग कार्रवाई नहीं करते। वहीं अगस्त 2018 से अगस्त 2019 तक के मामलों पर नजर डाले तो जिले में 305 लोगों ने आत्महत्या की थी।
लॉकडाउन में आत्महत्या के मामले बढ़े
कोरोना काल में लॉकडाउन में भी आत्महत्या के मामले बढ़े हैं। 24 मार्च से 31 अगस्त 2020 तक आत्महत्या के 203 मामले सामने आए जिसमें सिर्फ 58 लोगों ने ही मुकदमे दर्ज कराएं। आर्थिक तंगी या फिर भूखमरी के चलते पुलिस रिकॉर्ड में मामले दर्ज नहीं हैं।
पुलिस ने आत्महत्या कई मामलों में गंभीरता से जांच पड़ताल की। जिसमें पारिवारिक विवाद कारण सामने आया। दबाव या फिर उत्पीड़न के 35 मुकदमे में पुलिस ने कार्रवाई भी की है। - अजय कुमार साहनी, एसएसपी