मनुष्य अपना कल्याण स्वयं करे : मुनिश्री
मवाना। हस्तिनापुर श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में शनिवार को विधान के पांचवें दिन 110 परिवारों द्वारा विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न की गईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिनेंद्र भगवान के अभिषेक से हुआ। इसके पश्चात जगत की शांति के लिए, घर एवं परिवार में खुशहाली के लिए, रोग, शोक, दु:ख, दरिद्रता निवारण के लिए शांतिधारा की गई। शांतिधारा के अवसर पर श्रावक श्रेष्ठी रवि जैन, सुषमा जैन, निखिल जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा से पूर्व श्री जिनेन्द्र भगवान की जिन प्रतिमा को लेकर चल रहे इंद्र-इंद्राणियों में अपार हर्ष था। भगवान को चंवर ढुलाते हुए झालर, घंटा के दिव्यघोष के साथ श्री जी को पांडुक शिला पर विराजमान किया गया था।
आचार्य श्री भारत भूषण जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से चल रहे इस अनुष्ठान में आ. श्री विशद सागर जी महाराज, मुनिश्री भावभूषण जी महाराज, मुनिश्री विशाल सागर जी महाराज एवं मुनिश्री भव्य भूषण एवं मुनिश्री मंगलानंद जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। मुनिश्री ने भक्तों को संबोधित में आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिनेंद्र भगवान की भक्ति पर श्रद्धा रखो और आप भी अपना कल्याण करो। श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भगवान की अष्ट द्रव्य से पूजन कर भक्ति की।
ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने सायंकालीन प्रवचन किए। इसके पश्चात संगीतमय महाआरती के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। जिनके पुरस्कार रवि जैन, सुषमा जैन ने प्रदत्त किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन सर्राफ, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, उपाध्यक्ष जीवेन्द्र जैन, मंत्री श्री प्रद्युमन कुमार, मंत्री राजीव जैन, नवीन कुमार, देवेंद्र कुमार, राकेश, सुशील, शंशाक, विजय जैन आदि समस्त पदधिकारीगणों का सहयोग रहा।