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हिंदी भवन में चल रही डेयरी पर अगले सप्ताह फैसला

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हिंदी भवन में चल रही डेयरी पर अगले सप्ताह फैसला
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- हिंदी समिति के पदाधिकारी आज करेंगे जिलाधिकारी से मुलाकात
- डेयरी को बाहर करने के साथ ही कबाड़ियों का कब्जा हटाने में मांगी जाएगी मदद
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। हिंदी भवन में चल रही डेयरी पर अगले सप्ताह फैसला होगा। अमर उजाला द्वारा हिंदी भवन के संरक्षण और संवर्धन को लेकर चलाए जा रहे अभियान के बाद समिति भी सक्रिय हो गई है। बृहस्पतिवार को समिति पदाधिकारियों ने डेयरी के साथ ही अन्य कब्जों को हटवाने के लिए जिलाधिकारी से मुलाकात कर मदद मांगी। जिस पर तय हुआ कि अगले सप्ताह इस मामले में कार्रवाई तय की जाएगी।
पटेल नगर स्थित पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन इस समय पूरी तरह से बदहाल स्थिति में है। लगभग अस्तित्व खो चुके हिंदी भवन के परिसर में इस समय डेयरी चल रही है, तो कई अन्य अस्थायी कब्जे हैं। लगभग 2800 वर्ग मीटर जमीन में स्थापित हिंदी भवन की 800 मीटर जमीन पर तो डेयरी ही चल रही है। जबकि सिविल डिफेंस से परिसर खाली कराने के बाद बाकी भवन को हिंदी भवन समिति ध्वस्त करा चुकी है। हिंदी भवन की इस स्थिति को लेकर अमर उजाला ने समाचार प्रकाशित करने के साथ इसके उद्धार के लिए अभियान छेड़ा हुआ है। जिस पर अभी तक लगभग उदासीन समिति भी सक्रिय हो गई है।
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बृहस्पतिवार को हिंदी भवन समिति के कुछ पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी अनिल ढींगरा से मुलाकात की। इस दौरान जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी नगर और सिटी मजिस्ट्रेट को भी वार्ता में बुलाया। सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी ने इस मामले में हिंदी भवन समिति को शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन देने के साथ एडीएम सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट को कार्रवाई की बाबत निर्देश दिए। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह प्रशासन अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई शुरू करेगा।
25 मई को होगी कोर्ट में सुनवाई
हिंदी भवन परिसर में चल रही डेयरी को लेकर अपर लघुवाद न्यायालय में वाद दायर हुआ था। जिसमें मजिस्ट्रेट ने 13 अप्रैल 2017 को दो माह के भीतर डेयरी हटाने के आदेश दिए थे। लेकिन हिंदी भवन समिति डेयरी को खाली नहीं करा पाई। इस दौरान डेयरी संचालक ने अपर कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ वाद दायर कर दिया। जिसे वापस सुनवाई के लिए अपर लघु वाद न्यायालय में भेज दिया गया है। जहां पर इस मामले में 25 मई को सुनवाई होनी है।
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महिला मंच भी देगा सहयोग
उत्तर प्रदेशीय महिला मंच की महासचिव ऋचा जोशी और डॉ. अर्चना जैन ने हिंदी भवन को लेकर अमर उजाला की मुहिम का स्वागत किया है। ऋचा जोशी ने कहा कि उनके पिता जो कि पत्रकारिता से जुड़े थे, उन्हें हिंदी भवन समिति द्वारा कभी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा कैलाश प्रकाश गौतम ने भी हिंदी भवन को बचाए रखने की हर संभव कोशिश की थी। इस मुहिम में महिला मंच भी अपना पूरा सहयोग करने को तैयार है। क्योंकि हिंदी भवन की उपयोगिता से सिर्फ छात्र व शिक्षक ही नहीं बल्कि समाज के सभी लोग लाभान्वित होंगे।
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