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उपेक्षा के चलते वजूद के संकट से जूझ रहे तालाब

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अमर उजाला ब्यूरो
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मवाना। सरकार के तमाम प्रयास के बाद भी मवाना तहसील में अधिकतर तालाबों के गले सूखे पड़े हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जल संरक्षण के लिए सफाई कराकर खोदे गए तालाबों को आज भी पानी से लबालब नहीं किया जा सका है। एक ओर सरकार जल संरक्षण को लेकर जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रही है। उनके अधिकारी ही जल संरक्षण से महत्वपूर्ण अभियान को पलीता लगाने में लगे हैं।
दस-दस तालाबों का मिला था लक्ष्य
वर्ष 2018 में सरकार ने मानसून के दस्तक देने से पहले सभी ब्लॉकों को दस-दस तालाबों की सफाई कराकर पानी से लबालब करने का लक्ष्य दिया था। चिह्नित तालाबों में से कुछ में मनरेगा के तहत सफाई शुरू कराई थी, लेकिन यह चार-पांच दिन बाद बंद हो गया था। जिस कारण सरकार की जल संरक्षण की मंशा वाली योजना धरी रह गई।
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तालाब विकास प्राधिकरण गठित
तालाबों का अस्तित्व बचाने के लिए एंटी भूमाफिया फोर्स के साथ-साथ तालाब विकास प्राधिकरण का गठन किया था। जहां तालाबों पर कब्जे थे, उन्हें मुक्त कराने के बाद तालाब विकास प्राधिकरण द्वारा उन्हें पानी से लबालब करना था, लेकिन मवाना तहसील की बात करें तो अधिकतर तालाब सूखे पड़े हैं। मवाना तहसील अंतर्गत मवाना ब्लॉक, परीक्षितगढ़ ब्लॉक, हस्तिनापुर ब्लॉक, माछरा ब्लॉक तथा किठौर क्षेत्र के आबादी में 375 एवं बाहर 268 तालाब आते हैं।
कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हटेे कब्जे
जल संरक्षण एवं लगातार घट रहे जल स्तर से निपटने के लिए पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने भी तालाबों पर हो रहे अवैध निर्माण एवं कब्जों को हटाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में भाजपा सरकार ने प्रदेश में सरकार बनाने के बाद एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया था। इसके बाद भी देहात क्षेत्र में तालाबों की स्थिति आज भी दयनीय है। बहुत से तालाबों पर लोगों ने कब्जा कर उपले पाथ लिए हैं। कई तालाबों में खेती की जा रही है। चुनिंदा तालाब है ही पानी से लबालब हैं। अधिकतर तालाबों को गांव के गंदे पानी की निकासी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
मत्स्य पालन वाले तालाबों पर ही फोकस
देखरेख नहीं होने तथा प्रशासन की उपेक्षा के चलते तालाब अपना अस्तित्व खो रहे हैं। सरकार लगातार जल स्तर बढ़ाने एवं जल संरक्षण को लेकर अधिकारियों को निर्देश दे रही है, लेकिन अधिकारियों का ध्यान सिर्फ मत्स्य पालन वाले तालाबों पर ही है। दरअसल इन तालाबों से तहसील को हर साल लाखों रुपये की आमदनी होती है। इसलिए इन तालाबों को पानी से लबालब रखा जाता है। हर साल इनकी सफाई पर भी ध्यान दिया जाता है। इनके अतिरिक्त अन्य तालाबों पर मात्र एक-दो दिन फावड़ा चलाकर कार्य की इतिश्री कर ली जाती है।
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चुनाव के बाद तालाबों की स्थिति को मौके पर जाकर देखा जाएगा। इसके लिए टीम गठित की जाएगी, जो रिपोर्ट देगी। इसी आधार पर सूखे तालाबों में पानी भरवाया जाएगा। गंदगी से अटे तालाबों की सफाई कराई जाएगी। वहीं, कब्जा मुक्त भी कराया जाएगा।-अंकुर श्रीवास्तव, एसडीएम मवाना
मुख्य बातें
मवाना तहसील अंतर्गत आबादी में 375 एवं बाहर 268 तालाब
तालाबों पर अवैध कब्जे की शिकायत बरकरार
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