अभी जिंदा हैं मेरठ में मेट्रो चलने की उम्मीदें
- पीपीपी मॉडल के तहत मेट्रो चलाने के मूड में सरकार
- शासनादेश जारी कर प्राधिकरण को भेजे कंसल्टेंट चयन के तरीके
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
मेट्रो को चलाने के लिए सरकार प्रयासरत है। अब सरकार इसे पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप के तहत चलाने का मन बना चुकी है। इसके लिए कंसल्टेंट का चयन किया जाना है। हाल ही में सरकार की तरफ से विकास प्राधिकरण को पत्र लिखकर मेट्रो रेल परियोजनाओं के संचालन के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने के नियमों को भेज दिया है। मेरठ में मेट्रो को चलाने के लिए बजट में प्रदेश सरकार की तरफ से 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसी को देखते हुए सरकार ने मेरठ में मेट्रो का संचालन करने की उम्मीदों को जिंदा रखा है।
पिछले कई सालों से मेरठ में मेट्रो चलाने के लिए जद्दोजहद चल रही है। इसके लिए कई बार लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की टीम ने दौरा किया। शहर के नक्शे पर भी कई बार वार्ता हो चुकी है। यहां तक किए एमडीए में मेट्रो के कार्य की निगरानी के लिए मेट्रो सेल का कार्यालय भी खोल दिया गया था। इसके बाद भी प्रोजेक्ट पर संशय बना हुआ है।
सात फरवरी को शासनादेश जारी
शासन की तरफ से सात फरवरी को शासनादेश जारी कर दिया गया है। इसमें कंसल्टेंट चयन की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया है। उसमें भविष्य में आने वाली शहरी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज को भी पीपीपी मॉडल के तहत शुरू करने का प्रावधान दिया है। जिससे सरकार पर अतिरिक्त खर्च का बोझ न पड़ सके।
कई बार संशोधित हुई डीपीआर
मेट्रो चलाने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को कई बार बनाया जा चुका है। डीपीआर में तीन बार संशोधन किया गया। इसके बाद साल-2018 में यूपी सरकार ने मेट्रो की डीपीआर को केंद्र सरकार के पास भेज दिया था। हालांकि, मेट्रोमैन श्रीधरन ने पीपीपी मॉडल पर मेट्रो के संचालन को सिरे से नकार दिया था। लेकिन एक बार फिर सरकार पीपीपी मॉडल पर इसके संचालन के लिए तैयार हुई है।
ऐसे होगा कंसल्टेंट का चयन
कंसल्टेंट चयन के लिए पांच पैरामीटर तय किए गए हैं। इसमें प्रोजेक्ट पर रुचि, योग्यता, प्रपोजल, रेफरेंस व बिडिंग प्रोसेस और टाइम मैनेजमेंट रखा गया है। कंसल्टेंट को प्रोजेक्ट के लिए टीम लीडर, बिजनेस प्लानिंग, फाइनेंस एक्सपर्ट, रियल एस्टेट एक्सपर्ट, सीनियर कंसल्टेंट, जूनियर कंसल्टेंट की टीम बनानी होगी। इसके बाद मेट्रो प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू किया जा सकेगा।
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मेट्रो के दो कॉरीडोर
पहला कॉरीडोर : परतापुर से मोदीपुरम को रैपिड रेल के साथ जोड़ा गया।
दूसरा कॉरीडोर: श्रद्घापुरी फेस-दो से मेडिकल होते हुए गोकुलपुर।