- रिटेलर और निजी डॉक्टर नहीं दे रहे टीबी के मरीजों का ब्योरा
- मार्च में सरकार जारी कर चुकी है गजट नोटिफिकेशन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। साल 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का अभियान मेरठ में अभी तक परवान नहीं चढ़ा है। दरअसल, दवा रिटेलर और निजी चिकित्सक टीबी के मरीजों का ब्योरा देने में लापरवाही बरत रहे हैं। जहां 294 चिकित्सकों में से 141 ने ही ब्योरा दिया है, वहीं 1750 दवा रिटेलर में से सिर्फ 12 ने ही यह जानकारी जिला क्षय रोग विभाग या औषधि निरीक्षक को उपलब्ध कराई है। यह हालात तब हैं जब सरकार इस साल 16 मार्च को इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है। इसके अलावा प्रधानमंत्री 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का वादा कर चुके हैं।
छह माह से दो साल तक हो सकती है सजा
गजट नोटिफिकेशन के तहत केमिस्टों और टीबी का इलाज करने वाले निजी चिकित्सकों को टीबी के मरीजों की सूचना प्रत्येक माह औषधि निरीक्षक के माध्यम से जिला क्षय रोग केंद्र पर भेजनी है। टीबी के मरीजों की सूचना जानबूझकर छिपाने पर छह माह से दो साल तक की सजा का प्रावधान है। इस संबंध में आईएमए अध्यक्ष को 24 मार्च को नोटिफिकेशन प्रपत्र भेज दिया गया है।
डाटा मेंटेन करने में नहीं आएगी दिक्कत
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएस फौजदार का कहना है कि दवा रिटेलर और निजी चिकित्सकों को टीबी के मरीजों का ब्योरा रखने के लिए परफॉर्मा दिए गए हैं। आधार कार्ड और मोबाइल नंबर की जानकारी भी उसमें देनी होती है। डिटेल आने पर इन्हें टीबी के मरीजों के लिए बनाए गए निश्चय पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। यदि किसी मरीज का ब्योरा दोबारा आता है तो पोर्टल उसे नहीं लेता। उनका दावा है कि इसे रिकॉर्ड मेंटेन में करने में दिक्कत नहीं होती।
क्या है टीबी
टीबी एक जीवाणु संक्रमण रोग है, जो माइक्रो बैक्टीरिया से फैलता है। ज्यादातर मामले दूसरे मरीज से प्राप्त संक्रमण के कारण उपजी टीबी के होते हैं।
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भेजे जा रहे हैं रिमाइंडर
आईएमए से जुड़े निजी चिकित्सकों को इस संबंध में जानकारी देने के लिए रिमाइंडर भेजे गए हैं। कार्य के बोझ और स्टाफ की कमी के कारण रिकॉर्ड अपडेट करने में व्यवहारिक परेशानी आ रही है, इसके अलावा जिन चिकित्सकों के पास टीबी के मरीज नहीं आए हैं, उन्हें ब्योरा भरने में दिक्कत है। -डॉ. मेधावी तोमर, अध्यक्ष, आईएमए मेरठ शाखा
ब्योरा देने में नहीं गंभीर
टीबी के मरीजों का ब्योरा देने के संबंध में पिछले दिनों केमिस्टों के साथ बैठक भी की गई। इसके बावजूद इसमें सुधार नहीं आया है। दवा रिटेलर सिर्फ 12 ही हैं जो ब्योरा दे रहे हैं। निजी चिकित्सक का प्रतिशत भी कम ही है। इस संबंध में आईएमए को भी लिखा गया है। -डॉ. एमएस फौजदार, जिला क्षय रोग अधिकारी