मेरठ। एसटीएफ सीओ बृजेश कुमार सिंह के निर्देश पर चौधरी चरण सिंह विवि प्रशासन ने रविवार रात व्हाइट बिल्डिंग को सील कर दिया। एसटीएफ के अधिकारियों का कहना है कि व्हाइट बिल्डिंग में ही उत्तर पुस्तिका विभाग है। कॉलेजों की परीक्षा होने के बाद उत्तर पुस्तिकाएं यहीं रखी जाती हैं।
कॉपियां बदलने के इस मामले में एसटीएफ की तरफ से थाना मेडिकल पर सात आरोपियों को नामजद किया गया। लेकिन माना जा रहा है कि थाना पुलिस द्वारा इस मुकदमे की विवेचना गंभीरता से नहीं की जा सकती। ऐसे में विवेचना के लिए एसआईटी (स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम) का भी गठन किया जा सकता है। पुलिस के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ही एसआईटी का गठन किया जाता है। एसआईटी में सीओ या एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी के अलावा इंस्पेक्टर भी शामिल किए जाते हैं जिसमें लीगल एक्सपर्ट भी रहते हैं।
4-6 करोड़ रुपये तक कमा चुके
सीओ एसटीएफ ने बताया कि उत्तर पुस्तिका बदलने के पूरे गिरोह में अभी तक यही सामने आया कि बिजनौर निवासी कविराज जागृति विहार में रह रहा है। साल 2013 में मेरठ से बीए करने के बाद विवि कैंपस में जाकर छात्रनेताओं के साथ धरना प्रदर्शन करते-करते कर्मचारियों से मिल गया। एसटीएफ का कहना है कि यह गिरोह अभी तक करीब चार से छह करोड़ रुपये कमा चुका है। कविराज ने जागृति विहार में मकान बनाया है। पूछताछ में कविराज ने बताया कि उसने प्लॉट खरीदकर मकान में लाखों रुपये लगा दिए। वहीं, एसटीएफ ने सभी नामजद आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच करने की बात कही है। जिसके लिए पुलिस और बैंक अधिकारियों से सहयोग लिया जाएगा। एसटीएफ का कहना है कि काली कमाई के बाद इस गिरोह ने अलग-अलग नामों से बैंक में खाते खुलवा रखे हैं।