केएमसी में हुए क्लिपिंग विधि से सफल ऑपरेशन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। केएमसी अस्पताल में तीन मरीजों का क्लिपिंग विधि द्वारा सफल ऑपरेशन किया गया है। न्यूरो सर्जरी विषय में क्लिपिंग बेहद जटिल और खतरनाक ऑपरेशन माना जाता है और ज्यादातर मरीजों को दिल्ली रेफर कर दिया जाता था। अब इन मरीजों को दिल्ली रेफर न करके मेरठ में ही काफी समय से सफल ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान न्यूरो सर्जन डॉ. अमित बिंदल ने बताया कि अब इस लंबर माइक्रोडिसैक्टॉमी नामक अत्याधुनिक तकनीक से दो सेमी. के सूक्ष्म चीरे से डिस्क का ऑपरेशन किया जाता है। हाल ही में मोदीनगर निवासी मरीज 22 वर्षीय मुकुल का इसी पद्धति से सफल ऑपरेशन किया गया। यह मरीज खिसकी हुई डिस्क से नस दबने के कारण पिछले सात महीनों से बिस्तर पर था। ऑपरेशन के बाद अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है। उन्होंने बताया कि इस तरह का ऑपरेशन मेरठ में पहली बार किया गया है। स्पाइन फ्रैक्चर या रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर को भी सूक्ष्म विधि द्वारा ऑपरेशन किया जा सकता है। हाल ही में पांडव नगर निवासी मरीज श्याम नारायण को स्पाइन में फ्रैक्चर होने के कारण केएमसी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। 1.5 सेमी. के सूक्ष्म चार चीरों द्वारा सूक्ष्म विधि से इनके फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन किया गया। अब तक इस तरह केऑपरेशन की सुविधा सिर्फ दिल्ली के बड़े कारपोरेट अस्पतालों और एम्स में उपलब्ध थी, लेकिन अब मेरठ में भी इस तकनीक के सफल हो रहे हैं।
केएमसी केचेयरमैन डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि सूक्ष्म विधि से किए जाने वाले ऑपरेशन से मरीजों को दर्द कम होता है। अस्पताल में कम रहना पड़ता है। इंफेक्शन का खतरा नहीं रहता है और खून का स्राव भी कम होता है। लेकिन यह तकनीक अत्यंत मुश्किल है और बहुत ही चुनिंदा अस्पतालों में उपलब्ध है। केएमसी अस्पताल का नाम अब इस सूची में जुड़ गया है। खिसकी हुई डिस्क एवं विभिन्न रीढ़ की हड्डी के रोगों का दूरबीन विधि से ऑपरेशन मेरठ में भी मुमकिन हो गया है। अमूमन खिसकी हुई डिस्क का ऑपरेशन लम्बा चीरा लगाकर किया जाता है, जिसमें मरीज को बहुत समय तक लेट कर रहना पड़ता है। इस दौरान एनेस्थेटिस्ट एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. राजेश मिश्रा, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. रजनी यादव और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञा, केएमसी की निर्देशिका डॉ. प्रतिभा उपस्थित रहे।