शहर में होटल 100 से ज्यादा, एनओसी 18 पर
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
मुंबई में पब में आग लगने से हुई 14 लोगों की मौत के बाद शासन के निर्देश पर मेरठ के होटलों में भी शनिवार को जांच शुरू की गई। शहर में सौ से ज्यादा होटल हैं, लेकिन एनओसी मात्र 18 होटल संचालकों ने ही ली है। वहीं जिले में हर रोज आग की औसतन दो घटना होती हैं।
मुख्य अग्नि शमन अधिकारी अजय कुमार शर्मा शनिवार को एफएसओ पुलिस लाइन और एफएसओ परतापुर के साथ होटलों में पहुंचे। ब्रावुरा गोल्ड रिसोर्ट, ओलीविया और अमनतास में टीम ने जांच की। होटल के निकासी द्वारा, फायर उपकरणों के अलावा दस अन्य बिंदुओं पर जांच पड़ताल की गई। सीएफओ ने बताया कि तीनों होटलों में मानक सही पाए गए। अन्य होटलों में भी जांच पड़ताल की जा रही है। नववर्ष को लेकर जहां जहां इवेंट होने हैं वहां फायर उपकरण के अलावा निकास द्वारा, लिफ्ट, विंडो और फायर संबंधी उपकरणों की व्यवस्था देखी जा रही है।
निकासी द्वार सबसे महत्वपूर्ण
सीएफओ ने बताया कि किसी भी होटल या संस्थान में आग से बचाव के उपकरणों के साथ सबसे महत्वपूर्ण निकासी द्वार है। कोई भी अप्रिय घटना होने पर वहां मौजूद लोग कितनी जल्द किसी रास्ते से निकलेंगे यह निकासी द्वार पर निर्भर करता है। कई मंजिला होटलों में लिफ्ट के साथ सीढ़ियों और विंडो की व्यवस्था होनी चाहिए। फायर ब्रिगेड में एक सीएफओ, दो एफएसओ, 13 लीडिंग फायर मैन, 18 फायर सर्विस चालक, 76 फायर मैन और 13 अन्य कर्मचारी हैं। पुलिस लाइन, मवाना, परतापुर और घंटाघर पर फायर स्टेशन हैं। 12 मोटर फायर इंजन वाली बड़ी गाड़ी, एक हाईड्रोलिक प्लेटफार्म मशीन, इसकी लिफ्ट 42 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच सकती है। चार फायर की छोटी गाड़ी, दो बुलेट और पांच एंबुलेंस हैं।
यह है एनओसी का प्रावधान
फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार 2005 में ही अग्निशमन एक्ट बना है। शासन ने 2005 से पहले बने भवनों में अलग से छूट दी थी। लेकिन जो भवन 2005 के बाद बनाए गये उनमें एनओसी का प्रावधान निर्धारित किया गया। किसी भवन के चारों तरफ फायर ब्रिगेड की गाड़ी घूम सके , सीढ़ी 1.5 मीटर से कम चौड़ी नहीं होनी चाहिए। 15 मीटर की दूरी पर दूसरी सीढ़ी होनी चाहिए। मानक के अनुसार होजरिल, पंपिंग टैंक, डाउन कवर, हाईडेंट सिस्टम, अंडर ग्राउंड टैंक, लिफ्ट आवश्यकतानुसार होनी जरूरी है। जिले में 169 फायर हाईड्रेंट लगे हुए हैं। जहां से पानी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में भरा जा सकता है।
आग की घटनाएं
इस साल 2017 में जिले में 564 आग की सूचना फायर ब्रिगेड ऑफिस में पहुंची। 27 करोड़ 23 लाख का सामान चपेट में आया, सात करोड़ तीन लाख रुपये का नुकसान आग से जलकर हुआ। वहीं टीम ने बीस करोड़ की संपत्ति को आग से जलने से बचाया। एक गाय की जलकर मौत हुई, पांच व्यक्ति और नौ पशु आग से बचाए गये। 2016 में आग की आग की 681 सूचना दर्ज हुईं। करीब 18 करोड़ की संपत्ति जोखिम में आई। छह करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ। चार पशु की मौत हुई, 16 व्यक्ति और पांच पशु आग से बचाए गए। 2015 में आग लगने की 603 सूचनाएं दर्ज की र्गइं। 50 करोड़ की संपत्ति आग की चपेट में घिरी, जहां से 4 करोड़ 79 लाख की संपत्ति की आग से क्षति हुई। वहीं करीब 45 करोड़ की संपत्ति को आग से बचाया गया। आग से 13 लोगों की मौत हुई, 10 पशु भी मारे गये। जबकि 44 लोग व 26 पशुओं की आग से जान बचाई गई।
खास बात
मुंबई में हुई घटना के बाद मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने होटलों में पहुंचकर की जांच पड़ताल