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मौत का खौफनांक मंजर देख कांप उठी रूह

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आंखों के सामने घूम रहा मौत का वो मंजर
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अचानक घर से घूमने निकल पड़े थे सभी दोस्त
मेरठ।
परतापुर फ्लाई ओवर पर हुए हादसे में बचे युवक शायद ही कभी अपने तीन दोस्तों की मौत का वो खौफनाक मंजर भूल पाएंगे। पीछे बुलट पर चल रहे सौरभ के अनुसार हादसे में मरे मोहित और मानवेंद्र फुफेरे भाई थे। मोहित को छोड़कर सभी खतौली की जमुना विहार कालोनी के रहने वाले हैं। सहपाठी और पड़ोसी होने की वजह से सभी में अच्छी दोस्ती है।
सोमवार शाम को अचानक उनका गेझा घूमने का कार्यक्रम बना। पुनीत ने अपनी पल्सर ली और सौरभ ने बुलट। दुर्घटना के बाद बाइक को नीचे गिरते उन्होंने अपनी आंखों से देखा। ये मंजर देख उनके होश फाख्ता हो गए। बुलट रोककर पुल के नीचे झांका तो तीनों दोस्त जमीन पर पडे़ थे। उनकी चीख निकल गई। आसपास कोई नजर नहीं आया। तीनों दोस्त धीरे धीरे पुल पर साइड से पत्थरों पर पैर रखकर किसी तरह नीचे पहुंचे। तीनों दोस्त लहूलुहान थे। एक आटो वाले को रुकवाया और कुछ लोगों की मदद से आटो में डालकर उन्हें सुभारती अस्पताल ले गए ।
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हाथ कांपने लगे, गला रुंध गया
सौरभ ने बताया कि अपने दोस्तों की हालत देख उनकी जुबान से बोल नहंी निकल पा रहे थे। गला रुंध गया था। समझ नहीं आया कि उनके परिजनों को कैसे फोन करें। हाथ कांप रहे थे। लोगों ने हिम्मत बंधाई। कुछ ही देर बाद उनके परिजन आने शुरू हो गए और अस्पताल में ही कोहराम मच गया।


आखिर कब तक जान लेता रहेगा यह फ्लाईओवर
परतापुर फ्लाईओवर आखिर कब तक लोगों की जान लेता रहेगा। यहां पता नहीं कब किसी जान चली जाए। हर बार हादसे के बाद सरकारी सिस्टम खामोश रहता है। पिछले पांच साल में एक दर्जन लोगों की फ्लाईओवर से नीचे गिरकर जान जा चुकी है। कभी भी सरकारी तंत्र ने मौके पर पहुंचकर यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर इसी जगह हर बार हादसे क्यों होते हैं।
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मेरठ से दिल्ली की तरफ जाते समय जैसे ही परतापुर फ्लाईओवर पर वाहन चढ़ते हैं, तो ऊंचाई के साथ इस फ्लाईओवर पर तीव्र घुमाव है। जिसके चलते दिन में कई बार गंभीर हादसे हुए हैं तो रात में कोहरा या धुंध के चलते बड़ा हादसा होने की आशंका रहती है। फ्लाईओवर पर रेलिंग भी मानक के अनुसार नीची है, ऐसे में कोई भी दोपहिया या चौपहिया वाहन घुमाव के समय रेलिंग से टकराकर नीचे ही गिरता है। सबसे ज्यादा हादसे भी रात के समय दोपहिया वाहन चालकों के साथ होते हैं। एक माह पहले नोएडा निवासी युवक बाइक समेत फ्लाईओवर से नीचे गिर गया था। हेलमेट से युवक की जान तो बच गई थी। लेकिन गंभीर चोट लगी थी। जनवरी 2017 में गाजियाबाद निवासी युवक की बाइक समेत नीचे गिरने से मौत हो गई थी। दो साल पहले भी दो युवकों की मौत इसी स्थान से गिरने से हुई थी। कई बार यहां से बाइक सवार झाड़ियों में गिरने से बचे भी हैं।
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