बिना अधिग्रहण और मुआवजे के अपने नाम कर ली जमीन
नगर निगम ने तहसील कर्मियों से सांठगांठ कर किया बड़ा खेल
माधवपुरम में करीब 72 करोड़ रुपये की 9हजार वर्ग मीटर जमीन में हुआ खेल
पाकिस्तान विस्थापितों को सरकार ने 1949 में किया था बैनामा
मूल मालिकों के पास मौजूद है रजिस्टर्ड बैनामा और खसरा
अनुज मित्तल
मेरठ।
बंटवारे के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर आये परिवारों को सरकार ने स्थापित करने के लिए जमीनें दी, लेकिन सरकारी विभाग ही इनके हक पर कब्जा कर बैठा। ऐसा ही एक मामला दिल्ली रोड पर माधवपुरम का सामने आया है। जिसमें बेशकीमती 9 हजार वर्ग मीटर जमीन नगर निगम ने गुपचुप ढंग से अपने नाम करा ली। जबकि इस जमीन के मालिकों से नगर निगम ने कोई मुआवजा या अधिग्रहण की कार्रवाई तो दूर, बात तक नहीं की। अब जमीन मालिक नगर निगम के कब्जे से जमीन को मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं।
ये है पूरा मामला
1947 में देश का जब बंटवारा हुआ था तो बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान से भारत आ गये थे। इनमें हजारों लोग मेरठ में आकर बसे थे। इन्हीं में 15 परिवारों को दिल्ली रोड स्थित राजस्व ग्राम माफी दमाम (वर्तमान में माधवपुरम क्षेत्र) में मुख्य मार्ग पर 16 जमीनों के खसरों की जमीन स्थापित होने के लिए दी गयी थी। यह जमीन केंद्र सरकार के राहत एंव पुनर्वास मंत्रालय ने वर्ष 1949 में देने के आदेश दिये थे। जिस पर तभी इन लोगों ने जमीन का रजिस्टर्ड बैनामा करा लिया था।
इसके बाद इस जमीन के खसरा में इन सभी 15 परिवारों के मुखियाओं के नाम दर्ज हो गये थे। तब से लेकर आज तक रजिस्ट्री विभाग में जहां जमीन इन्हीं परिवारों के नाम पर रजिस्टर्ड है, तो तहसील के रिकार्ड में खसरा में भी इन परिवारों का नाम दर्ज है। इन लोगों में सौदागरमल, संतराम, रामशाह विनायक, रामआसरे, शिवदत्त, गोपालदास, मोरीलाल, गुरुदेव सिंह, बंशी लाल विनायक, नरेंद्र कौर, रामजीदास, खैरातीलाल, प्यारेलाल, मनोहरलाल, सत्यपाल के नाम दर्ज हैं।
खाली जमीन पर निगम ने किया खेल
इस जमीन के आसपास की जमीन आवास एवं विकास परिषद ने अधिग्रहण करते हुए माधवपुरम कालोनी विकसित कर दी। पाकिस्तान से विस्थापित होकर आये इन परिवारों की जमीन के कोने तक आकर आवास एवं विकास परिषद की योजना पूरी हो गयी और इस जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ। खाली पड़ी इस जमीन के खसरा नंबर 2004, 2019 और 2020 की करीब 9000 वर्ग मीटर जमीन पर नगर निगम ने तहसील से सांठगांठ कर खेल कर दिया। करीब दस साल पहले राजस्व रिकार्ड की खतौनी में यह जमीन बंजर दर्शाते हुए नगर निगम का नाम दर्ज कर दिया गया। जबकि रजिस्ट्री विभाग के रिकार्ड और तहसील की खसरा रिकार्ड में अभी ये पाकिस्तान विस्थापित परिवार जमीन के मालिक हैं।
न अधिग्रहण न ही दिया मुआवजा
जमीन मालिकों के एक वारिस रोहित मलिक ने बताया कि पिछले दिनों इस जमीन पर निर्माण की बाबत जब राजस्व रिकार्ड से खसरा खतौनी निकलवायी तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। जिसमें पता चला कि नगर निगम ने मुख्य मार्ग पर स्थित तीन खसरा नंबर की करीब 9हजार वर्ग मीटर जमीन को खतौनी में अपने नाम दर्ज करा लिया है। जबकि इस दौरान नगर निगम या जिला प्रशासन की तरफ से जमीन अधिग्रहण का कोई नोटिस उन्हें प्राप्त नहीं हुआ और न ही कोई मुआवजा आदि उन्हें दिया गया। रोहित मलिक के अनुसार जब इस मामले में नगर निगम जाकर जानकारी ली गयी तो किसी ने कुछ भी पता होने या बताने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद से इस जमीन पर अपने मालिकाना हक को लेकर वह प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई भी कुछ बताने के लिए तैयार नहीं है।
बेशकीमती है जमीन
यह जमीन मेरठ दिल्ली मुख्य मार्ग पर नवीन मंडी स्थल के सामने है। जिसका उपयोग पूरी तरह व्यवसायिक है और सर्किल रेट के हिसाब से यह जमीन जमीन 80 हजार रुपये प्रतिवर्ग मीटर है। जिसके चलते इसकी कीमत 72 करोड़ रुपये के करीब बैठती है। जबकि बाजार कीमत इससे कहीं बहुत ज्यादा है।
वर्जन....
जमीन का रिकार्ड देखा जा रहा है। बिना रिकार्ड देखे कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। एक दो दिन में स्थिति स्पष्ट कर दी जायेगी।
राजेश कुमार, संपत्ति अधिकारी नगर निगम