- पर्वराज पर्यूषण महापर्व धर्म का पूजन विधान शुरू
- श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में हुआ कार्यक्रम
मेरठ। श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में पर्वराज पर्यूषण पर्व पर प्रथम उत्तम क्षमा धर्म का शुभारंभ किया गया। नित्य अभिषेक पश्चात सुबह सात बजे शांतिधारा का सौभाग्य राकेश जैन, एके जैन और सुभाष चन्द जैन को मिला।
पं. ऋषभ शास्त्री ने सहस्त्र नाम विधान का वाचन किया। उन्होंने बताया कि संसार से पार होने के लिए भक्ति नौका के समान है। आचार्य जिन सेन स्वामी ने भी भक्तों से भक्ति मांगी है। उत्तम क्षमा पर ऋषभ शास्त्री ने बताया कि क्षमा ही वह शक्ति है जिसमें वैचारिक प्रदूषण से मुक्ति मिलती है। अपने जीवन में क्षमा का दीपक जलाए रखोगे तो क्रोध कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। अंधेरे को भगाने के लिए डंडे की जरूरत नहीं होती, उसके लिए केवल एक दीपक जलाना ही पर्याप्त है। क्षमा भी एक ऐसा ही दीपक है। जिसे जलाकर आप अपने जीवन के अंधेरे को दूर कर सकते हैं। शाम के समय मंदिर में मंगल ज्योति एवं आरती की गई। इसके पश्चात तत्व चर्चा एवं प्रश्न मंच पं. ऋषभ शास्त्री द्वारा कराया गया। बच्चों द्वारा नाटिका- ‘‘भक्ति में शक्ति का सुंदर मंचन किया गया। निर्भय सागर पाठशाला के पुरस्कार बांटे गए। संरक्षक राजेंद्र जैन, जेके जैन, राकेश जैन, सुभाष जैन आभा, पूनम, मेघना, मोनिका, दीपा, इतिका, सोनिया, श्वेता, अरु, सर्वज्ञ, आर्जवी आदि का सहयोग रहा।
भजनों पर किया नृत्य
मेरठ। दिगंबर जैन समाज के पर्यूषण पर्व के पहले दिन दुर्गाबाड़ी सदर स्थित दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। विधान में सम्मिलित धर्मावलंबी इंद्र-इंद्राणियों की वेशभूषा में पूजा में शरीक हुए। रामकुमार द्वारा गाए गए भजनों पर नृत्य करके इंद्र इंद्राणियों ने जिनेंद्र देव की आराधना की। सुनील जैन, दिनेश कुमार जैन, मृदुल जैन आदि का मुख्य सहयोग रहा। विधानाचार्य ब्रह्मचारी धीरज भैया ने कहा कि वर्ष में एक बार भाद्र मास में आने वाले दस लक्षण पर्व हमारे पौराणिक संस्कारों को जीवित रखने का काम करते हैं। व्रत, संयम, तप, त्याग, जीव दया के भावों को मन में रख वास्तविक श्रावकों का धर्म इन 11 दिनों में हमें निभाना चाहिए।