दूसरे पत्र में लिखा है कि सभी का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया गया है। इसके तहत जो रिक्तियां थीं, वह पूरी कर ली गई हैं। कुल 90 अभ्यर्थी हैं। यह पत्र चयन समिति की संस्तुति के आधार पर डायरेक्टर जनरल लखनऊ के आधार पर जारी किया जाता है। यह भी लिखा है कि चतुर्थ श्रेणी के उम्मीदवार को भी नियुक्ति पत्र भेज दिया गया है।
इससे लग रहा है कि कहीं नर्सों के साथ-साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भी तो ऐसी ही सूची जारी नहीं की गई। भाषा और टाइपिंग का फांट लगभग वैसा ही है, जैसा सीएमओ कार्यालय में इस्तेमाल होता है, हालांकि इसमें कई शाब्दिक गलतियां भी हैं, जैसे- संस्तुति और डायरेक्टर आदि।
आयुष्मान योजना में भी लाभ लेने के लिए हो चुका फर्जीवाड़ा
आयुष्मान योजना में भी लाभ लेने के लिए फर्जीवाड़ा हो चुका है। साल 2019 में एक आयुष्मान मित्र ने खेलकर कर 18 फर्जी कार्ड बनवाए थे। बाद में एफआईआर हुई थी। 2020 में भी एक निजी अस्पताल में मरीज से ही इलाज का पैसा ले लिया गया था।
यह जालसाजी है, चंगुल में न फंसे
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि ऐसी कोई भर्ती नहीं हुई है। पत्र देखने से ही यह कूट रचित साजिश प्रतीत हो रही है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। पुलिस जांच में पता चलेगा कि किसने यह सब किया है। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि किसी के चंगुल में न फंसे। अगर कोई स्टाफ नर्स की नौकरी के नाम पर झांसा दे रहा है तो इसकी सूचना तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में दें।