मेरठ। खाद्य पदार्थों में बड़े स्तर पर मिलावट का खेल किया जा रहा है। नवरात्र-दशहरा पर लिए गए 26 नमूनों में से 22 फेल हो गए। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने लाखों रुपये का जुर्माना वसूला है।
विभाग ने इस साल अक्तूबर में 171 नमूने लिए थे, जिनमें से 38 नमूनों की रिपोर्ट आई है। इनमें 28 नमूने फेल हैं। इनमें नवररात्र और दशहरा पर लिए नमूने भी शामिल हैं। इनमें 20 मामलों केस किया गया था, जिनमें 15 लाख 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। इस साल अप्रैल से लेकर अक्तूबर तक एफएसडीए ने नमूने फेल होने पर किए केसों में 60 लाख, 87 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
रहें सावधान... बॉडी बनाना न पड़ जाए भारी
फेल हुए नमूनों में तीन नमूने हेल्थ सप्लीमेंट के हैं। इनमें सिंथेटिक कलर की मिलावट पाई गई है। यह मिलावट शरीर में पहुंचकर लिपिड प्रोफाइल यानी खून के कई सारे अवयवों को प्रभावित करते हैं। सिंथेटिक्स कलर कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ाने के साथ हृदय संबंधी बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इससे पुरुषों में प्रजनन क्षमता कम हो सकती है।
आजीवन कारावास तक हो सकती है सजा
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए जाएंगे, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलेगा। इसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा के साथ ही तीन लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
खाद्य पदार्थ बनाने के ये हैं नियम
- खाद्य पदार्थों में प्रतिबिंधित पदार्थ की मिलावट न करें
- खाद्य सामग्री खुले में न रखें
- शुद्ध पानी का इस्तेमाल करें
- संक्रामक रोग से ग्रसित कर्मचारी को खाद्य निर्माण प्रतिष्ठान में न रखें
- बर्तन साफ और धुले हुए हों
- बासी खाद्य सामग्री का प्रयोग न करें
बीमार होने का रहता है खतरा
फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि मिलावट और गंदगी में बन रहे खाद्य पदार्थ खाने से बीमार होने का खतरा बना रहता है। सबसे ज्यादा पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बदहजमी आदि शिकायतें हो सकती हैं। मिलावटी पदार्थ का लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।