फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व गुर्दा दिवस आज

विज्ञापन
विज्ञापन
विश्व गुर्दा दिवस आज
विज्ञापन


सेहत से है प्यार तो किडनी न होने पाए बीमार
- खून में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ने पर ही पता चलता है किडनी रोग
- 40 साल के बाद हर साल एक फीसदी की दर से कमजोर होने लगती है किडनी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। गुर्दा (किडनी) की बीमारी साइलेंट किलर है। इससे प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मेडिकल साइंस में इसे क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) कहते हैं। इसमें किडनी काम करना बंद कर देती है। इस बीमारी से बचाने और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए मार्च के दूसरे बृहस्पतिवार को वर्ल्ड किडनी डे (विश्व गुर्दा दिवस) मनाया जाता है।
चिकित्सकों की सलाह है कि अगर कई बीमारियों से बचना है तो किडनी का ख्याल रखना होगा। आमतौर पर 40 साल के बाद हर साल एक फीसदी की दर से किडनी कमजोर होने लगती है। चिकित्सकों ने बताया कि कुछ अध्ययनों के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं में गंभीर किडनी रोग अधिक देखने को मिलते हैं। महिलाओं में गंभीर किडनी रोग की समस्या 14 प्रतिशत होती है जबकि पुरुषों में 12 प्रतिशत।
विज्ञापन


देर से मिलता है बीमारी का संकेत
शुरुआती स्टेज में किडनी की बीमारी को पकड़ पाना मुश्किल है। दोनों किडनी के करीब 50 से 60 फीसदी खराब होने के बाद ही खून में क्रिएटनिन बढ़ना शुरू होता है। रक्त में पाए जाने वाले वेस्ट को ही क्रिएटनिन कहते हैं। सामान्यत: किडनी इसे छानकर शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन कई बार शरीर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने के बाद किडनी इसे बाहर नहीं कर पाती। इसी कारण रक्त में क्रिएटनिन बढ़ने लगता है।
विज्ञापन

- डॉ. प्रशांत बेंद्रे, गुर्दा रोग विशेषज्ञ

हाईबीपी और शुगर हैं किडनी के दुश्मन
हाई ब्लड प्रेशर और शुगर किडनी के दुश्मन हैं। खाने पीने में सावधानी रखकर किडनी को सही रखा जा सकता है। पेस्टीसाइड का ज्यादा इस्तेमाल, फास्ट फूड आदि किडनी की सेहत खराब कर रहे हैं। पिछले 10 सालों में किडनी के मरीजों की संख्या करीब 15 प्रतिशत बढ़ चुकी है।
- डॉ. प्रदीप कुमार, गुर्दा रोग विशेषज्ञ
---
किडनी के सेहत के लिए गोल्डन रूल्स
- सप्ताह में पांच बार 30-30 मिनट की एक्सरसाइज करें
- ब्लड प्रेशर और शुगर को चेक कराते रहें और कंट्र्रोल में रखें
- वजन चेक कराते रहें, बॉडी इंडेक्स मास (बीएमआई) 25 से ज्यादा न होने दें
- धूम्रपान से दूर रहें, पेन किलर का कम से कम प्रयोग करें
- प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक का इस्तेमाल करें
- अंगूर खाएं, ये किडनी से फालतू यूरिक एसिड निकालते हैं
- मैग्नीशियम किडनी को सही से काम करने में मदद करता है, इसलिए गहरे रंग की सब्जियां खाएं।
-----
यह आदतें पहुंचाती हैं नुकसान
- पेशाब आने पर रोक लेना, कम पानी पीना, ज्यादा नमक खाना, हाई बीपी के इलाज में लापरवाही,
शुगर के इलाज में कोताही, ज्यादा मांस खाना, अधिक पेनकिलर लेना, धूम्रपान करना, पर्याप्त आराम न करना, सॉफ्ट ड्रिंक्स व सोडा ज्यादा लेना।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें