तीन मीटर चौड़ाई जमीन पर खड़ा होगा एलिवेटेड ट्रैक
- रैपिड रेल के शिलान्यास के बाद तेज गति से हो रहा कार्य
- एनसीआरटीसी ने वीडियो में बताईं प्रोजेक्ट की खूबियां
- 67 किमी ट्रैक बनाया जाएगा एलिवेटेड
दीपक भारद्वाज
मेरठ। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का शिलान्यास होने के बाद कार्यों को तेज कर दिया गया है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की तरफ से प्रोजेक्ट के एलाइनमेंट और टेंडर पर कार्य किया जा रहा है। एनसीआरटीसी ने प्रोजेक्ट में तेज गति दिखाते हुए पहले चरण के निर्माण कार्य से पहले किए जाने वाले कार्य को एक साल में पूरा कर रखा है। साहिबाबाद से दुहाई के बीच होने वाले पहले चरण के निर्माण कार्य में चंद महीनों का इंतजार है। एनसीआरटीसी ने 82 किमी के प्रोजेक्ट की वीडियो बनाकर इसकी खूबियों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
दिल्ली से मेरठ तक रैपिड रेल के एलिवेटेड ट्रैक के लिए तीन मीटर की चौड़ाई पर ही एलिवेटेड ट्रैक को खड़ा कर दिया जाएगा। वीडियो में बताया गया है कि चार लेन के निर्माण के लिए 40 मीटर चौड़ी जमीन की जरूरत होती है, लेकिन, प्रोजेक्ट के लगभग 67 किमी के एलिवेटेड ट्रैक के लिए मात्र ढाई से तीन मीटर चौड़ाई की जरूरत होगी। जिससे आसानी से बिना व्यवधान के दिल्ली-मेरठ हाईवे पर इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। 82 किमी के प्रोजेक्ट में 15 किमी अंडरग्राउंड और 67 किमी ट्रैक एलिवेटेड बनाया जाएगा।
घने कोहरे के लिए कंट्रोल सिस्टम
वीडियो में घने कोहरे और बारिश में बनाए जाने के लिए सेंट्रल कंट्रोल सिस्टम बनाया जाएगा। यहां वर्ल्ड क्लास मशीनों, सिग्नल आदि द्वारा ऐसे मौसम में रैपिड रेल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जिससे बिना रुके यात्री एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से समय पर पहुंच सकेंगे। वहीं, 5-10 किलोमीटर की दूरी पर स्टेशन तय किए गए हैं। इसके लिए स्टेशनों का एलाइनमेंट तैयार कर लिया गया है।
प्री-कंस्ट्रक्शन के लिए निकला टेंडर
पहले चरण के निर्माण कार्य शुरू करने से पहले एनसीआरटीसी ने 11 मार्च को प्री-कंस्ट्रक्शन स्टेज के सिविल कार्य के लिए टेंडर निकाला है। 10 अप्रैल को टेंडर खोला जाएगा। एनसीआरटीसी का दावा है कि पहले चरण का निर्माण कार्य अगले छह महीनों के अंदर जमीन पर दिखने लगेगा। पहले चरण में 16.5 किलोमीटर ट्रैक का कार्य शुरू किया जाना है।
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वर्जन...
तैयारियों को तेज गति
हमारी तरफ से तैयारियों को तेज गति दी जा रही है। एलिवेटेड ट्रैक के लिए ढाई और तीन मीटर चौड़ाई की जरूरत है। इसके बाद आसानी से ट्रैक बनाया जा सकता है।
-सुधीर कुमार शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, एनसीआरटीसी