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स्कूलों और बस अड्डों तक सिमटकर रह गया सड़क सुरक्षा अभियान

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स्कूलों और बस अड्डों तक सिमटकर रह गया सड़क सुरक्षा सप्ताह
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- आरटीओ प्रवर्तन दल अवैध वाहनों पर नहीं कस पा रहा शिकंजा
- शहर से लेकर गांव तक दौड़ रहे अवैध वाहन, जागरुकता रैली और स्वास्थ्य शिविरों पर ही खर्च हो गया सड़क सुरक्षा का बजट, कहीं नहीं लगे पोस्टर, बैनर और होर्डिंग
मेरठ। परिवहन विभाग का सड़क सुरक्षा सप्ताह कुछ स्कूलों और बस अड्डों तक ही सिमटकर रह गया। न तो लोगों को जागरूक करने के लिए शहर में होर्डिंग, बोर्ड और पोस्टर लगे और न ही जर्जर, खटारा अवैध वाहनों पर शिकंजा कसा जा सका। ये असुरक्षित वाहन शहरवासियों के जी का जंजाल बने हैं। अधिकारियों ने कुछ लोगों के साथ मिलकर मिले बजट की बंदरबांट कर ली। लोगों को पता ही नहीं चल सका कि सड़क सुरक्षा सप्ताह कब शुरू हुआ और कब खत्म हो गया।
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लोगों को सड़क सुरक्षा और यातायात से संबंधित नियम कायदों की जानकारी देने के साथ ही अवैध वाहनों पर डंडा चलाने के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह और सड़क सुरक्षा माह आदि का आयोजन किया जाता है। इसके लिए परिवहन विभाग से मोटा बजट आवंटित किया जाता है। मिलने वाले बजट से प्रदेश के सभी संभागीय परिवहन कार्यालयों को शहर भर में होर्डिंग आदि लगाकर लोगों को सड़क सुरक्षा के लिए जागरूक करना था। पोस्टर और पंफलेट आदि का भी प्रयोग किया जाना था। लेकिन पिछले दिनों शुरू हुआ सड़क सुरक्षा सप्ताह कुछ स्कूलों और रोडवेज बस अड्डों पर ही सिमटकर रह गया। इन जगहों पर ही विभाग ने एक दो संगोष्ठी और हेल्थ चेकअप कैंप लगाकर इतिश्री कर ली। बताया जा रहा है कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के लिए दो लाख रुपये का बजट आया था। इस पूरे बजट की कुछ कार्यक्रमों के जरिए ही बंदरबांट कर दी गई। शहर भर में कहीं पर भी लोगों को जागरूक करने और सड़क सुरक्षा के नियमों और कायदों की जानकारी वाले होर्डिंग आदि नहीं लगाए गए।

नहीं कसा गया अवैध वाहनों पर शिकंजा
सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान शहर और बाहरी क्षेत्रों में घूम रहे अवैध वाहनों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका। डग्गामार वाहन पहले की तरह यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते रहे और बिना पंजीकरण और परमिट के वाहन दौड़ते रहे। आरटीओ के प्रवर्तन दल ने भी अवैध वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान नहीं चलाया। शहर भर में पहले की तरह जरूरत से ज्यादा ई-रिक्शा, टैंपो और अवैध स्कूटर रिक्शा पर कोई लगाम नहीं लग सकी है।
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क्या बोले अधिकारी
सड़क सुरक्षा सप्ताह के लिए आए बजट अनुसार ही सात दिन के कार्यक्रम तय हुए थे। उसी के अनुसार कार्यक्रम कर लोगों को जागरूक किया गया। स्कूलों में संगोष्ठी की और बस व ट्रक चालकों के लिए स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए गए। बोर्ड आदि नहीं लगे तो इसकी जानकारी की जाएगी।
डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ
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