कठुआ मामले में फंस सकता है यूनिवर्सिटी प्रशासन
मेरठ। जम्मू के कठुआ में दस साल की बच्ची की रेप और हत्या के आरोपी विशाल जंगोत्रा के उपस्थिति पत्र में हस्ताक्षर को लेकर आई फोरेंसिक रिपोर्ट ने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी प्रशासन और कॉलेज को मुश्किलों में डाल दिया है।
दरअसल यह मामला कोर्ट में है, ऐसे में आरोपी विशाल की झूठा साक्ष्य बनाने में मदद करने के मामले में कोर्ट यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर सकती है। जिसका जवाब देना यूनिवर्सिटी के लिए मुश्किल हो जाएगा। एक तरफ जहां इतना बड़ा मामला हो गया है। वहीं, यूनिवर्सिटी की जांच समिति अभी तक भी विभागीय जांच को आगे नहीं बढ़ा पाई है।
जम्मू के कठुआ में विगत 10 जनवरी को आठ साल की बच्ची का अपहरण करने के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में जम्मू पुलिस ने सांझीराम नाम के एक व्यक्ति, उसके नाबालिग भतीजे और दो अन्य लोगों को गैंगरेप और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने सांझीराम के बेटे विशाल जंगोत्रा के भी दुष्कर्म और हत्या में शामिल होने की बात कही थी। विशाल मुजफ्फरनगर के मीरापुर में रहकर आकांक्षा कॉलेज से बीएससी एजी कर रहा था। उसकी नौ जनवरी से खतौली केके जैन डिग्री कॉलेज में परीक्षाएं चल रही थीं।
विशाल का दावा था कि वो घटना के वक्त पेपर दे रहा था। वहीं, इस मामले में जम्मू एसआईटी ने दावा किया था कि विशाल 11 जनवरी की शाम मीरापुर से जम्मू गया और वारदात को अंजाम दिया। खुद को बचाने के लिए उसने अपनी जगह 12 जनवरी को किसी दूसरे युवक से परीक्षा दिला दी। इस मामले में यूनिवर्सिटी की भूमिका पर सवाल उठने के बाद कुलपति ने जांच समिति गठित कर दी थी। विशाल जंगोत्रा की बीएससी एजी प्रथम वर्ष की कॉपियों की फोटो स्टेट से जांच में सामने आया था कि विशाल ने नौ जनवरी, 12 जनवरी, 15 जनवरी और 29 जनवरी तक की सभी नौ परीक्षाएं दीं। हस्ताक्षर उसने उपस्थिति पत्र और कॉपियों में अंग्रेजी में किए थे। हालांकि मार्कशीट में विशाल फेल हो गया था। इस मामले में जम्मू एसआईटी ने यूनिवर्सिटी से जब्त की विशाल की कॉपियों और उपस्थिति पत्र को फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा था।
रविवार को जम्मू एसआईटी ने दावा किया कि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में सामने आया कि उपस्थिति पत्र पर विशाल के हस्ताक्षर मुख्य हस्ताक्षर से मेल नहीं खा रहे हैं। एसआईटी के मुताबिक विशाल की परीक्षाएं किसी ओर ने दीं। वहीं, इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन जहां फंसता दिखाई दे रहा है तो जांच समिति के सदस्यों को इससे शायद कोई मतलब नहीं है। वे बस इतना कह रहे हैं कि विशाल उनके सामने लिखे तो समिति राइटिंग की पहचान करे। ऐसा होगा नहीं और जांच आगे बढ़ेगी नहीं।
खास बातें:
- कोर्ट में देना पड़ेगा विशाल जंगोत्रा की परीक्षा को लेकर जवाब
- विशाल के हस्ताक्षर को लेकर फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने बढ़ाई मुश्किलें