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ढाई हजार नई फर्मों पर लटकी कार्रवाई की तलवार

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मेरठ। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में पंजीकरण कराने के बावजूद करीब 2499 फर्मों का रिटर्न दाखिल नहीं किया गया। मुख्यालय स्तर से इन फर्मों पर जांच बैठाते हुए कार्रवाई की तलवार लटक गई है। वाणिज्य कर विभाग ने टीमें गठित कर पड़ताल शुरू कर दी है। यदि फर्म के पते पर व्यापार होता नहीं मिला तो उसका पंजीकरण निरस्त कराया जाएगा।
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इसका मकसद यह भी है कि प्रदेश में वास्तविक करदाताओं की संख्या स्पष्ट हो सके। अभी स्थिति ये है कि जीएसटी के अंतर्गत पंजीकृत फर्मों की संख्या अधिक है, जबकि रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या काफी कम है। महानगर में करीब 47 हजार फर्म एसजीएसटी के तहत पंजीकृत हैं। इनमें 30 हजार पुरानी हैं और 17 हजार 344 नई हैं। इनमें से 2499 फर्म ऐसी हैं, जिन्होंने जीएसटीआर रिटर्न दाखिल नहीं किया है। स्टेट जीएसटी के कमिश्नर के आदेश हैं कि रिटर्न दाखिल न करने वाली फर्मों के स्थलों की नियमित जांच की जाए। इसकी सूचना निर्धारित प्रोफार्मा में हर सप्ताह इम्पलाई इन्फॉर्मेशन सिस्टम में दिए गए मॉड्यूल में उपलब्ध कराई जाए।
सात दिनों में दें नोटिस
निरस्तीकरण के योग्य पाई जाने वाली फर्म के मालिक को सात दिन के अंदर नोटिस दिया जाए। इसका जवाब व्यापारी को 30 दिन में देना होगा। जवाब से असंतुष्ट होने पर निरस्तीकरण की कार्रवाई होगी। इसी तरह घोषित व्यापार स्थल से व्यापार न किए जाने और अथवा माल और सेवाओं की आपूर्ति किए बिना बिल जारी करने की स्थिति में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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257 फर्मों की सूची तैयार
वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर एके राय ने बताया कि रिटर्न दाखिल न करने वाली 257 फर्मों की सूची तैयार कर जांच शुरू कर दी गई है। बाकी की सूची तैयार हो रही है। अगर किसी ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन करा रखा है तो उसे जीएसटीआर 3बी भरना अनिवार्य है। भले ही संबंधित कारोबारी क्रेडिट लेना न चाहे। अगर कारोबार नहीं हुआ है तो भी रजिस्टर्ड कारोबारियों को निल जीएसटीआर 3बी भरना होगा। जीएसटीआर-3बी के तहत महीने भर में माल की सारी बिक्रियां और सारी खरीद के हिसाब से अभी कितना टैक्स जमा करना है या रिफंड वापस पाना है, यह आता है। यानी यह रिटर्न आपकी बिक्री और खरीद की समरी है।
जीएसटी पोर्टल पर जमा होगा अर्थदंड
मेरठ। जीएसटी पोर्टल पर अर्थदंड जमा करने की व्यवस्था शुरू हो गई है। स्टेट जीएसटी मुख्यालय से इस संबंध में गाइड लाइन जारी की गई है। पंजीकृत व्यापारियों को अर्थदंड दाखिल कराना होगा। सर्कुलर में पकड़े जाने के माल को छोड़े जाने की जानकारी भी साझा होगी। वाणिज्य कर अधिकारियों ने बताया कि अगर अर्थदंड जमा करने वाला पंजीकृत है तो वह खुद पोर्टल पर चालान जनरेट कर उसे जमा करेगा। नहीं तो ऐसी स्थिति में डिमांड ड्राफ्ट के जरिए देय धनराशि जमा कराई जाएगी। दूसरी तरफ, अपंजीकृत कारोबारी के संबंध में देय धनराशि जीएसटीएन पोर्टल पर चालान जनरेट कर जमा कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सभी जोनल एडिशनल कमिश्नर को निर्धारण अधिकारी को नामित करने के निर्देश दिए हैं।
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जीएसटी की खास बातें
47 हजार फर्म हैं महानगर में एसजीएसटी के तहत पंजीकृत
30 हजार इनमें पुरानी तो 17344 फर्म हैं नई
- मुख्यालय तक पहुंचा मामला, वाणिज्य कर विभाग ने की जांच शुरू
- फर्म के पते पर व्यापार होता न मिला तो पंजीकरण होगा निरस्त
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