थैलेसीमिया से बचना है तो शादी से पहले कराएं खून की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। नोएडा सेक्टर-128 स्थित मल्टी सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थान जेपी हॉस्पिटल द्वारा रक्त संबंधी बीमारियों से लोगों को सचेत करने के लिए मेरठ के होटल में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जेपी हॉस्पिटल के हिमेटो ऑन्कोलॉजी एवं बोन मेरो ट्रांसप्लांट विभाग के चिकित्सक डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि रक्त संबंधित दो तरह की बीमारियां होती हैं। पहला कैंसर और दूसरा नॉन कैंसर। नान कैंसर बीमारियों में थैलेसीमिया और ए प्लास्टिक एनिमिया प्रमुख बीमारियां होती हैं। थैलेसीमिया पर दो तरीकेसे नियंत्रण किया जा सकता है। पहला तरीका यह है कि शादी से पहले युवक एवं युवतियां अपने रक्त की जांच कराएं। यदि जांच में युवक और युवती दोनों थैलेसीमिया कैरियर पाए जाते हैं तो बच्चे को गंभीर रूप से थैलेसीमिया हो सकता है। दूसरा उपाय यह है कि यदि बच्चा थैलेसीमिया ग्रस्त जन्म लेता है तो बोन मेरो ट्रांसप्लांट द्वारा बीमारी ठीक की जा सकती है। इसके लिए दो से आठ साल की उम्र सबसे उचित मानी जाती है।
उन्होंने बताया कि ए प्लास्टिक एनिमिया में शरीर का रक्त सूख जाता है। बुखार, रक्तस्राव और कमजोरी जैसे लक्षण वाली इस बीमारी में भी मरीज को रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है। इस बीमारी का इलाज भी बोन मेरो ट्रांसप्लांट है। बीमारी का पता लगते ही जल्द से जल्द उपचार करा लेना चाहिए।
क्या है थैलेसीमिया
डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि थैलेसीमिया एक जन्मजात बीमारी है। भारत में हजारों लोग थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। हर वर्ष करीब 10 हजार नए थैलेसीमिया के शिशु पैदा होते हैं। इस रोग में शरीर में रक्त नहीं बनता और जीवनभर बाहरी रक्त के भरोसे जीना पड़ता है। रोगी को हर तीन-चार सप्ताह में रक्त चढ़ाना पड़ता है।
खास बात
जेपी अस्पताल ने कराया स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, रक्त संबंधी विकार के बारे में दी जानकारी