बेगमपुल के अवैध कांप्लेक्स पर गरजे एमडीए के बुलडोजर
- मंडलायुक्त की सख्ती से एक्शन में आया एमडीए
- शटर तोड़े, लेंटर तोड़ा, चले हथौड़े, जमकर हुआ हंगामा
- मौकेपर हुआ विरोध, शाहिद मंजूर ने कहा बाकी निर्माण खुद ही तोड़ लेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। बेगमपुल पर सोतीगंज मोड़ के पास बने पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के अवैध कांप्लेक्स पर शुक्रवार को एमडीए के कई बुलडोजर गरजे। मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार के निर्देश पर पहुंची इस टीम ने हथौडों से कांप्लेक्स केलेंटर को तोड़ डाला। इस दौरान जमकर हंगामा हुआ। बाद में बाकी निर्माण ध्वस्त करने के लिए एमडीए अधिकारियों ने एक सप्ताह का समय दिया। कहा कि निर्माणकर्ता इस अवधि में खुद ही निर्माण तोड़ लें।
शुक्रवार सुबह सात बजे एमडीए केसचिव राजकुमार, तहसीलदार करनवीर सिंह, एक्सईएन पीपी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट एमपी सिंह, एएसपी कैंट अंकित मित्तल, एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी, सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ल, सीओ सिविल लाइन चक्रपाणि त्रिपाठी और कई थानों की पुलिस समेत एमडीए का पूरा लाव लश्कर इस कांप्लेक्स पर पहुंच गया। कांप्लेक्स तोड़े जाने की सूचना पर यहां पहले ही शाहिद मंजूर, काफी व्यापारी और अन्य लोग इकट्ठा थे। अधिकारियों केसाथ शाहिद मंजूर तथा अन्य लोगों की जमकर नोकझोंक हुई। बाद में संयुक्त व्यापार संघ केअध्यक्ष नवीन गुप्ता भी पहुंच गए और विरोध दर्ज कराया।
एमडीए अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए तीन बुलडोजरों से ध्वस्तीकरण शुरू करा दिया। इसके अलावा टीम हथौड़ों से लेंटर तोड़ने में जुट गई। गैस कटर से पिलर और सरिया काटना शुरू करा दिया गया। लगभग पांच घंटे यह कार्रवाई चली। इस दौरान कांप्लेक्स स्वामियों ने कहा कि वह खुद ही इस निर्माण का तोड़ रहे हैं और कार्रवाई रोकी जाए। उनके कारिंदे भी हथौड़ों से लेंटर तोड़ने में जुट गए। इस पर अधिकारी सहमत हो गए और एक सप्ताह का समय दे दिया गया। इसर्स पूर्व यहां शटर तोड़े जा चुके थे तो लेंटर कई जगह से तोड़ दिया गया। सीढ़ियां आदि भी ध्वस्त कर दी गई।
यह फंसा है पेंच
यह कांप्लेक्स तीन प्लाट मिलाकर बना है। पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर की पत्नी गुलनाज शाहिद, दीपक कामरा के पुत्र देवेश कामरा, जान मोहम्मद के पुत्र जावेद, आइसा बेगम, अमित मित्तल के नाम ये प्लाट हैं। एमडीए अधिकारियों का कहना है कि तीन प्लाटों को मिलाकर एक कांप्लेक्स नहीं बनाया जा सकता है। ऐसे में यह पूरा निर्माण ही अवैध है। यहां फ्रंट पर पांच दुकानें बनी है और यह तीन मंजिला इमारत है। न सेट बैक छोड़ा गया है और न ही पार्किग। बता दें कि नियमों को तोड़कर बनाए जा रहे इस कांप्लेक्स का अमर उजाला ने खुलासा किया था जिस पर यहां कार्रवाई शुरू हुई थी। अवैध निर्माणों पर एक्शन अभियान केतहत मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने फाइल खंगाली तो इस कांप्लेक्स की विस्तार से जांच हुई। सामने आया कि यह पूरा ही अवैध है।
राजनीतिक द्वेष से हुई कार्रवाई : शाहिद मंजूर
शाहिद मंजूर ने कहा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक द्वेष से हुई है। इस प्रकरण में पांच साझीदार है और चार नक्शे पास हैं। उनका हिस्सा केवल 111 वर्ग गज का है। उनकी केवल तीन दुकानें हैं। बाकी तीन पार्टनराें के साथ हैं। यहां कुल 15 दुकानें हैं। पक्के बैनामे हैं। यदि कुछ गलत था तो पहले नक्शे पास क्यों किए गए? शमन के रूप में एडवांस रकम 5 लाख रुपये क्यों जमा कराई गई? सेट बैक नहीं है तो हमने खुद तोड़ने को कह दिया था। उन्होंने कहा कि यह सब जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को वोट न देने के कारण हुआ। चुनाव से पहले उन पर तथा पार्टनराें पर दबाव बना कि वोट दें नहीं तो कांप्लेक्स नहीं बचेगा। वोट नहीं दी तो यह कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वह खुद इस बाबत कमिश्नर से भी मिले थे और अपनी बात रखी थी। वह तो खुद ही अतिरिक्त निर्माण तोड़ने को तैयार हैं।
वर्जन
अवैध निर्माण पर एक्शन तय है: कमिश्नर
यह निर्माण अवैध है तो ध्वस्तीकरण हो होना ही था। शाहिद मंजूर मुझसे खुद मिले थे। उन्होंने खुद कहा कि अवैध निर्माणों पर हो रहा एक्शन सराहनीय है। उनके जो दस्तावेज हैं उसका भी अध्ययन करने को कहा गया है। खुद तोड़ें या एमडीए तोड़े, अवैध निर्माण तो हर सूरत में टूटेगा- डा. प्रभात कुमार, मंडलायुक्त