मेरठ कॉलेज आज मनाएगा 125वीं वर्षगांठ
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
मेरठ कॉलेज आज (15 जुलाई) 125 साल का हो गया है। कॉलेज स्थापना की जितनी बड़ी अवधि है, उतनी उसकी हैसियत भी है। 100 साल से अधिक का सफर कॉलेज का स्वर्णिम काल रहा है। अंग्रेजों से लेकर आधुनिक दौर में कॉलेज का दमखम बाकी है। मेरठ कॉलेज देश का पहला कॉलेज है जिसके पांच विभाग यूजीसी की सीपीई (सेंटर फॉर पोटेंशियल एक्सीलेंस) के तीसरे चरण में हैं। कॉलेज के पुरातन छात्रों ने आईएएस, जज, वैज्ञानिक और बड़े राजनेताओं तक का सफर तय किया है।
सन् 1892 में स्थापित कॉलेज की एक खास बात यह भी है कि चार विश्वविद्यालयों से संबद्ध रहा। स्थापना के समय कलकत्ता विवि से जुड़ा था। इसके बाद इलाहाबाद विवि, फिर आगरा विवि और अंत में चौधरी चरण सिंह विवि से जुड़ा। पहले पांच प्रिंसिपल यूरोपियन थे। पहले भारतीय प्रिंसिपल प्रो. बीआर चटर्जी थे। पुरातन महत्वपूर्ण छात्रों में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी हैं। उन्होंने यहां से बीएससी की है। पूर्व मंत्री सतपाल मलिक यहां के छात्र रहे। कई आईएएस और जज बने। वैज्ञानिक और शिक्षकों की लंबी फेहरिस्त है।
यूजीसी ने दी हेरिटेज ग्रांट
यूजीसी ने मेरठ कॉलेज की विरासत को देखते हुए हेरिटेज ग्रांट दी है। 100 साल पूरे करने वाले कॉलेजों को यह ग्रांट दी गई है। कॉलेज के पांच विभाग जूलॉजी, बॉटनी, फिजिक्स, केमेस्ट्री और डिफेंस स्टडी सीपीई स्कीम के तीसरे चरण में हैं। यूजीसी मेरठ कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी और ऑटोनॉमस कॉलेज बनाने का प्रस्ताव पेश कर चुकी है। इस पर कॉलेज मैनेजमेंट सहमत नहीं हुआ।
आज सेमिनार
कॉलेज के सवा सौ साल पूरे करने पर इतिहास विभाग शनिवार को उत्तर भारतीय परिप्रेक्ष्य में शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का इतिहास विषय पर सेमिनार आयोजित कर रहा है। सेमिनार में मेरठ कॉलेज द्वारा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश एरिया को कवर करने पर फोकस किया जाएगा। कॉलेज के सेल्फ फाइनेंस विभाग में सेमिनार होगा।
मेरठ कॉलेज एक नजर
छात्रों की संख्या 10 हजार से अधिक
शिक्षक 182
विभाग 23
खास बातें====
15 जुलाई 1892 में हुई थी कॉलेज की स्थापना, पहले पांच प्रिंसिपल अंग्रेज थे
देश का पहला कॉलेज जिसके पांच विभाग यूजीसी की सीपीई लिस्ट में शामिल
कॉलेज के पुरातन छात्र आईएएस, जज, वैज्ञानिक और चर्चित राजनेता तक बने