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गोपी की बरसी पर तनाव में शोभापुर

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गोपी की बरसी पर तनाव में शोभापुर
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मोनू गुर्जर हत्याकांड के सभी आरोपी अभी तक नहीं हुए गिरफ्तार
गोपी की बरसी पर किया था आरोपियों ने गांव में खूनखराबे का एलान
अमर उजाला ब्यूरो
कंकरखेड़ा/मेरठ। बीते साल दो अप्रैल की हिंसा के बाद चार अप्रैल को शोभापुर गांव में बसपा नेता गोपी पारिया की हत्या हुई थी। अनुसूचित जाति के युवकों ने गोपी की बरसी पर गांव में खूनखराबे का एलान किया था। इसको लेकर तनाव बना है। इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा एपी मिश्रा का कहना है कि गोपी की बरसी पर गांव में आरोपी पक्ष के लोगों ने किसी तरह का कोई कार्यक्रम नहीं रखा है। यदि ऐसा होता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आज बृहस्पतिवार को गोपी हत्याकांड को एक साल पूरा हो जाएगा। गोपी पारिया की हत्या के बदले में आशीष गुर्जर और फिर मोनू गुर्जर की हत्या कर दी गई थी। तभी से गांव में जातीय तनाव की स्थिति है। चर्चा है कि बरसी पर गांव में अनुसूचित जाति के लोग गोपी की प्रतिमा लगा सकते हैं। मोनू गुर्जर पक्ष के लोगों का कहना है कि गोपी की बरसी पर आरोपियों ने पांच युवकों की हत्या कर गोपी हत्याकांड का बदला लेने का एलान किया था। इसको लेकर दहशत है। लेकिन पुलिस इस बात को लेकर गंभीर नहीं है। मोनू हत्याकांड में पांच लोगों के खिलाफ नामजद व एक दर्जन लोगों के खिलाफ अज्ञात में केस दर्ज कराया था। पुलिस अभी तक सिर्फ इस मामले में ईशू व रोबिन नाम के आरोपियों को ही जेल भेज पाई है। मुख्य आरोपी गोपी का रिश्तेदार विनय उर्फ बजरंग, दीपक व अंशुल अभी फरार हैं। पुलिस आरोपियों का सुराग तक नहीं लगा पाई।
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मोनू के पिता का कहना है कि पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। गोपी की बरसी पर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं सुनने में आ रही हैं। वहीं आरोपी भी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। समझ नहीं आ रहा है कि आखिर पुलिस कैसे आरोपियों को पकड़ नहीं पा रही है। ऐसे में डर है कि कहीं फिर से आरोपी कोई अनहोनी न कर दें। इंस्पेक्टर का कहना है कि मोनू के हत्यारोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जल्द ही आरोपी जेल भेजे जाएंगे।
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