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बूचडखनों के खिलाफ तीन फरवरी को होने वाली जनसभा को लेकर, गांव फफूंडा में पंचायत

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अमर उजाला ब्यूरो
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खरखौदा। हापुड़ रोड क्षेत्र के बूचड़खानों को बंद कराने एवं काली नदी में साफ पानी छोड़ जाने को लेकर पर्यावरण सुधार संघर्ष समिति की ओर से जनआंदोलन चलाया जा रहा है। जिसको लेेकर पूरे जिले में 15 जनसभाएं हो चुकी हैं। अब तीन फरवरी को मेरठ में जिमखाना मैदान में बड़ी सभा होगी। जिसको लेकर समिति अध्यक्ष रवींद्र गुर्जर ने बृहस्पतिवार को गांव फफूंडा में पंचायत का आयोजन किया।
पर्यावरण सुधार संघर्ष समिति के नेतृत्व में पर्यावरण को बचाने के लिए आंदोलन जारी है। समिति का दावा है कि हापुड़ रोड क्षेत्र स्थित मीट फैक्टरियों से निकले गंदे पानी एवं काली नदी में बह रहे दूषित पानी ने क्षेत्र के भूजल स्तर को खराब कर दिया है। करीब एक माह पहले समिति ने जिलाधिकारी को इन मीट फैक्टरियों को बंद कराने व काली नदी में साफ पानी छोड़ने की मांग की गई थी। उनकी इस मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो समिति ने आंदोलन शुरू दिया। जिसको लेेकर जिले में 15 जनसभाएं हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री तक मांग पहुंचाने के लिए समिति ने तीन फरवरी को जिमखाना मैदान में बड़ी पंचायत प्रस्तावित है। इसको लेकर बृहस्पतिवार को गांव फफूंडा में भोपाल सिंह के आवास पर बैठक हुई। इसमें समिति अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर व आरएसएस के पूर्व प्रचारक तथा समिति महामंत्री शक्ति मोहन ने बताया कि जिससे पिछले दस वर्षों में हजारों लोग कैंसर, पीलिया जैसी कई घातक बीमारियों के ग्रास बन चुके हैं। पिछली सरकारों ने इन मीट प्लांट मालिकों को खूब संरक्षण दिया। आलम यह रहा है कि ये लोग अपने काले धंधों को छिपाने के लिए राजनीति में सक्रिय हो गए। यदि इनकी मीट फैक्टरियां मानक के अनुरूप नहीं चल रही हैं तो जिले पर तैनात अधिकारी की हिम्मत नहीं कि इन पर कार्रवाई कर दें। केंद्र व प्रदेश में चल रही भाजपा सरकार इन पर अंकुश लगा सकती है। समिति ने क्षेत्र के लोगों को बचाने का बीड़ा उठाया है। जब तक इन मीट प्लांट को बंद नहीं कराया जाएगा तब तक समिति संघर्ष करती रहेगी। यदि सरकार ने इन्हें बंद नहीं कराया तो सड़कों पर उतरेंगे। यहां संदीप प्रधान, वीर सिंह, मैनपाल, महताब पहलवान, टीलू प्रधान, रब्बू गुर्जर, मंगल सैन, त्रिलोक चंद, राकेश सहित कई लोग मौजूद रहे।
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फैक्टरियों पर बैंकों का करोड़ों रुपये कर्ज
मीट के व्यापार में मोटी बचत होने से कई व्यापारी इस धंधे में आ रहे हैं। इस व्यापार को खड़ा करने के लिए न जाने कितने मीट व्यापारियों ने एक-एक फैक्ट्री पर कई-कई करोड़ रुपये बैंकों से लोन ले रखा है। कई फैक्टरियों पर तो बैंकों ने अपना कब्जा भी कर लिया है।
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