त्योहारों में अटके मेनका प्रकरण पर कार्रवाई का इंतजार
मेरठ। मेनका सिनेमा मामले में कार्रवाई आज भी अटकी हुई है। कांवड़ यात्रा की तैयारी में जुटे पुलिस प्रशासन ने इस मामले में कांवड़ यात्रा के बाद कार्रवाई की बात कही, लेकिन अभी तक भी यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। जबकि इस मामले में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व तहसीलदार को खसरा नंबर 542 की पैमाइश करते हुए इस जमीन के सरकारी होने और काबिज लोगों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का पत्र भी जारी कर चुके हैं। बावजूद इसका अभी तक ठंडे बस्ते में रहना सभी को चौंका रहा है।
घंटाघर के पास स्थित मेनका सिनेमा सरकारी जमीन पर बना है। इसके तमाम साक्ष्य जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। लेकिन तहसील की रिपोर्ट के बिना पूरा मामला अटका हुआ है। खसरा नंबर 542 सरकारी अभिलेखों में नजूल में दर्ज है। अब इंतजार इस बात का है कि तहसील प्रशासन इस जमीन की पैमाइश कराते हुए यह तय करे कि मेनका सिनेमा क्या वास्तव में खसरा नंबर 542 में ही है या किसी और खसरा नंबर में है। इसके अलावा खसरा नंबर जो कि सरकारी जमीन है इस पर किन किन लोगों का कब्जा है। इसकी रिपोर्ट भी तलब की गई है।
इस मामले में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व और नजूल के नोडल प्रभारी आनंद कुमार द्वारा तहसीलदार सदर को पत्र लिखा जा चुका है। जिसमें उन्होंने उक्त जमीन की पैमाइश कराकर पूरी रिपोर्ट तलब करने के आदेश दिए हैं। लेखपाल इस पत्र को लेकर पैमाइश के लिए फोर्स उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है। क्योंकि जिस जगह पैमाइश होनी है, वह संवेदनशील जगह है। लेकिन पहले कांवड़ यात्रा, इसके बाद भाजपा कार्यसमिति की बैठक और फिर स्वतंत्रता दिवस और अब बकरीद के कारण लेखपाल को पैमाइश के लिए फोर्स नहीं मिल रही है। बिना पैमाइश के रिपोर्ट तैयार नहीं हो पा रही है, जिस कारण पूरी कार्रवाई अटकी हुई है।
अलकरीम को बचाने का तो प्रयास नहीं
खसरा नंबर 542 जिसमें मेनका सिनेमा है, उसी के रकबे में अलकरीम होटल भी बना है। पैमाइश होगी तो निश्चित रूप से यह अवैध कब्जा भी रिपोर्ट में आएगा। ऐसे में चर्चा है कि मेनका प्रकरण में तो बैंक और एमडीए अपने स्तर से कार्रवाई का चुके हैं। लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई अभी लंबित है। इसके पीछे अलकरीम को बचाने का प्रयास माना जा रहा है।
हमारी तरफ से पैमाइश की पूरी तैयारी है। लेकिन त्योहारों और अन्य कारणाें से पुलिस फोर्स नहीं मिल पा रही है। जैसे ही पुलिस फोर्स उपलब्ध होगी, तत्काल पैमाइश कराते हुए रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। संतोष कुमार, तहसीलदार सदर