सालों बाद सऊदी अरब के साथ हो सकती है भारत में ईद
मेरठ। सालों बाद सऊदी अरब से पहले या उसके साथ भारत में ईद उल फितर मनाई जा सकती है। उलेमाओं के अनुसार उन्होंने कभी सऊदी अरब के साथ उससे पहले ईद नहीं मनाई है। लेकिन भारत में इस बार रमजान के महीने की शुरूआत सऊदी अरब के साथ ही हुई। जिससे सऊदी अरब से पहले भी भारत में ईद हो सकती है।
देवबंद दारुल उलूम मुब्बलिग मौलाना यामीन कासमी ने बताया कि हमारे देश के मुस्लिम सऊदी अरब के अधीन नहीं हैं। हमारे देश में चांद दिखेगा तो ईद मनाएंगे। उन्होंने कहा सऊदी अरब के साथ हमने ईद कब मनाई होगी। यह तो याद नहीं है। लेकिन इस बार कुछ ऐसा ही संयोग बन रहा है। बृहस्पतिवार को चांद दिखा तो शुक्रवार को ईद होगी। कहा रमजान और ईद को लेकर देश में तीन मुस्लिम इदारे हैं। जिनमें दारुल उलूम देवबंद, इमारत ए शरईया पटना और जमियत उलमा ए हिंद दिल्ली शामिल हैं। इन तीनों इदारों के जिम्मेदार लोग ही रमजान और ईद को लेकर चांद दिखने की पुष्टि करते हैं। जिसके बाद पूरे देश में रमजान व ईद का ऐलान किया जाता है। शाही जामा मस्जिद के प्रवक्ता कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने बताया सऊदी अरब के साथ रमजान तो कई बार हुए हैं। लेकिन ईद एक साथ कभी नहीं हुई है। सऊदी अरब में चांद पहले नजर आता है। लेकिन जिस तरह रमजान सऊदी अरब के साथ शुरू हुए हैं। उससे सऊदी अरब व भारत में एक साथ ईद मना सकते हैं। उन्होंने कहा करीब चौदह सौ साल से मुस्लिम ईद मना रहे हैं। लेकिन हमारी 50 सालों की याद में पहले ऐसा संयोग कभी नहीं हुआ है। सऊदी अरब के साथ या उससे पहले ईद मनाने को लेकर मुस्लिम वर्ग में चर्चाओं का जोर है। लेकिन भारत की बड़ी मुस्लिम संस्थाएं जो फैसला करेंगी। यहां के लोगों को उस पर अमल करना पड़ेगा। बृहस्पतिवार को मुस्लिम परिवार के लोगों की नजरें चांद का इंतजार जरूर करेंगी।