गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ चेयरमैन का होना है चुनाव
भाजपा को पूर्व चेयरमैन पति ने दिया शुरूआती झटका
कोर्ट के आदेश पर अपनी दुग्ध समिति का चुनाव करा हुए नामित
मेरठ। सहकारी समितियों के चुनाव में अब दुग्ध संघ के चेयरमैन पद को लेकर घमासान तय है। फिलहाल भाजपा को पूर्व चेयरमैन पति ने शुरूआती झटका देते हुए कोर्ट के आदेश पर अपनी समिति का न केवल चुनाव कराया, बल्कि गगोल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के प्रतिनिधि के रूप में नामित भी हो गए हैं।
गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के चेयरमैन पद पर सपा सरकार में पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के करीबी वेदप्रकाश उर्फ बेदी की पत्नी इंद्रेश चेयरमैन निर्वाचित हुई थीं। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद से दुग्ध संघ में प्रशासक नियुक्त है। वेदप्रकाश की ग्राम कैलीरामपुर में दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति कैलीरामपुर है। लेकिन सितंबर 2017 में समितियों के चुनाव में सहकारी विभाग ने उनकी समिति का नाम ही बदल दिया। सितंबर में जारी हुई समितियों की अनंतिम सूची में उनकी समिति का नाम दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति कैलीरामपुर नवीन कर दिया गया। जिसके चलते उनकी समिति चुनाव से बाहर हो गयी।
इस मामले में वेदप्रकाश ने जिलाधिकारी के यहां शिकायत की, जिस पर हुई जांच में आरोप सही पाया गया और अपर जिलाधिकारी प्रशासन द्वारा भेजी गयी जांच रिपोर्ट में बताया गया कि नवीन शब्द बाद में जोड़ा गया है जो पूरी तरह संदिग्ध है और फर्जीवाड़ा दर्शाता है। इस जांच रिपोर्ट के बाद भी सहकारिता विभाग ने कोई संज्ञान नहीं लिया तो वेदप्रकाश ने हाईकोर्ट में वाद दायर कर दिया। जहां से समिति का चुनाव कराने का आदेश हुआ।
कोर्ट के आदेश पर सहकारिता विभाग ने इस समिति का निर्वाचन कार्यक्रम जारी करते हुए 18 मई को समिति के प्रतिनिधियों और 19 मई को समिति के पदाधिकारियों और अन्य समितियों को भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों का चुनाव करा दिया। इस चुनाव प्रक्रिया में दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति कैलीरामपुर के मोहित सभापति और ईश्वर उपसभापति चुने गए। जबकि वेदप्रकाश उर्फ बेदी को गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के प्रतिनिधि के रूप में नामित किया गया।
नहीं चला भाजपा का जोर
वेदप्रकाश सपा नेता और पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के अत्यंत करीबियों में माने जाते हैं। भाजपा का प्रयास था कि किसी भी तरह वेदप्रकाश को इस चुनाव से बाहर रखा जाए। लेकिन उन्होंने खुद को प्रतिनिधि के रूप में नामित कराते हुए शुरूआती झटका दे दिया है। एक तरफ जहां तमाम सहकारी संघों और जिला सहकारी बैंक पर भाजपा कब्जा कर चुकी है। वहीं, दुग्ध उत्पादक संघ का चुनाव रोचक होगा और इसमें घमासान तय माना जा रहा है।