हेपेटाइटिस-सी: ढाई हजार वेटिंग, रजिस्ट्रेशन बंद
अरीश रिज़वी
मेरठ। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी के मरीजों की भरमार है। अभी तक यहां स्क्रीनिंग केलिए तारीख मिलती थी। लेकिन अब रजिस्ट्रेशन ही अगले तीन माह के लिए बंद कर दिए गए हैं। अभी भी करीब ढाई हजार मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए वेटिंग हैं। आलम यह है कि ओपीडी के बाहर नोटिस चस्पा करना पड़ा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इकलौता हेपेटाइटिस-सी क्लीनिक जिला अस्पताल में पिछले साल 25 जनवरी को शुरू किया गया था। लेकिन इसका बाद में पूरा सेटअप लग पाया। डॉक्टर्स विद्आउट बॉर्डर एक इंटरनेशनल एनजीओ है, जो इसे जिला अस्पताल में संचालित कर रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों का इसमें निशुल्क इलाज किया जाता है। अब तक यहां करीब साढ़े तीन हजार मरीजों की स्क्रीनिंग हो चुकी है और 1400 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से कुछ का इलाज पूरा भी हो चुका है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता। इस कारण यह जानलेवा हो जाती है। इसके इलाज में 40-50 हजार रुपये का खर्च आता है। लेकिन यहां यह निशुल्क किया जा रहा है।
वेस्ट यूपी के आते हैं मरीज
ज्यादातर मरीज शहर के ही हैं। लेकिन यहां सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, शामली, बागपत और हापुड़ आदि जिलों के मरीज भी इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। इस क्लीनिक में तीन डॉक्टर, तीन नर्स, तीन काउंसलर, दो लैब टेक्नीशियन समेत 25 लोगों का स्टाफ है।
दो प्रकार के मरीज
हेपेटाइटिस सी के मरीज एक वह हैं जिनमें पूरी तरह से वायरस फैल चुका है, उन्हें हेपेटाइटिस का मरीज माना जाता है, दूसरे ऐसे जिनके खून में हेपेटाइटिस के वायरस होते हैं। लेकिन आसानी से लक्षणों का पता नहीं चल पाता। इन्हें हेपेटाइटिस कैरियर कहा जाता है। इन्हें हेपेटाइटिस की दिक्कत तो नहीं होती। लेकिन इनका ब्लड दूसरे व्यक्ति को चढ़ाने पर यह वायरस तेजी से इंफेक्शन करता है।
क्या है हेपेटाइटिस-सी
हेपेटाइटिस-सी (यकृतशोथ ग) इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस-सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। यह वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है।
ऐसे फैलता है यह रोग
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल
- पीड़ित गर्भवती महिला से बच्चे का होना
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा मिलना
- दूषित सुई से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना
- इंजेक्शन से नशीली दवाओं का प्रयोग करना एचसीवी संक्रमण का सबसे आम रास्ता है।
- कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, एचसीवी संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है।
यह हैं लक्षण
भूख कम लगना, थकान, पेट दर्द, पीलिया, अवसाद खुजली और फ्लू आदि जैसे लक्षण शामिल हैं।
यह बरतें सावधानी
- शराब बिल्कुल न पिएं
- लिवर में वसा न जमा होने दें
- पानी अधिक मात्रा में लें
- जांच नियमित कराते रहें
- आराम करें और नींद पूरी लें
- कच्चा या अधपका भोजन न करें
- शक्कर और नमक की उच्च मात्रा वाले आहार न लें
स्क्रीनिंग के बाद रजिस्ट्रेशन
मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही थी। स्क्रीनिंग के लिए भी कई-कई महीनों की तारीख देनी पड़ रही थी, जो कि मेडिकली सही नहीं है, लिहाजा फिलहाल तीन माह के लिए रजिस्ट्रेशन बंद हैं। कोशिश है कि जिन ढाई हजार मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए वेटिंग है, उसे जल्द पूरा कर फिर से रजिस्ट्रेशन शुरू किए जाएं। -डॉ. हेमंत, इंचार्ज, हेपेटाइटिस-सी क्लीनिक
खास बातें:
3500 मरीजों की हो चुकी स्क्रीनिंग, 14 सौ का हो चुका इलाज
-डॉक्टर्स विद्आउट बॉर्डर के तहत जिला अस्पताल में है क्लीनिक