नौचंदी मैदान से गायब हो गया घुड़दौड़ ट्रैक
मेरठ। नौचंदी मैदान में मेला आयोजन से पहले घोड़ों और ऊंटों की प्रदर्शनी लगा करती थी। घोड़ों को परखने के लिए मैदान के चारो तरफ घुड़दौड़ ट्रैक हुआ करता था। लेकिन आज यह ट्रैक कहीं नजर नहीं आता। इस जमीन पर लोगों ने कब्जा जमा लिया है। कागजों में करीब दो लाख वर्ग मीटर के इस मैदान से अब पचास हजार वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। इस जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए किसी ने ध्यान नहीं दिया। इससे मैदान सिमटता चला जा रहा है।
नौचंदी मेले का इतिहास सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। इस मेले से पहले मैदान में घोड़ों व ऊंटों की प्रदर्शनी लगा करती थी। तब से यह जमीन सरकारी संपत्ति में शामिल है। इस पर मालिकाना हक जिला पंचायत का चला आ रहा है। यह बात अलग है कि अब यह नगर निगम की सीमा में आने के कारण जिला पंचायत व नगर निगम के बीच विवाद का कारण बन गई है। लेकिन इस विवाद से अलग इस जमीन पर हुए कब्जे पर नजर डालें तो नौचंदी मैदान का कागजों में क्षेत्रफल करीब दो लाख वर्ग मीटर है। वर्तमान में इसकी पचास हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन पर स्थायी कब्जे हो चुके हैं। इस जमीन में खसरा नंबर 4122 और 4160 पर घोड़ों का ट्रैक था। यह ट्रैक राजस्व विभाग के सजरे में साफ नजर आता है। लेकिन अब धरातल पर नहीं है। इस ट्रैक की करीब 25 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा कर लिया गया है।
दूसरी जमीन पर भी हुए कब्जे
नौचंदी मैदान के चारों तरफ आबादी बसनी शुरू हुई तो इसकी जमीन पर भी लोगों की नजर पड़नी शुरू हो गयी। लोग आवास, दुकान और फैक्ट्री निर्माण कर मैदान की जमीन को कब्जाते रहे। इन कब्जेदारों ने करीब 25 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा कर लिया।
पांच साल पहले चला था अभियान
नौचंदी मैदान की जमीन बचाने और कब्जा मुक्त कराने के लिए करीब पांच साल पहले तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह ने प्रयास किया था। उन्होंने चारदीवारी की योजना भी तैयार की। कुछ जमीन से कब्जा भी हटवाया। लेकिन राजनैतिक दबाव में उनका यह प्रयास परवान नहीं चढ़ सका।
वर्जन.....
मेरी जानकारी में जिला पंचायत की संपत्तियों पर हुए कई कब्जे हैं। इनमें ग्रामों में कब्जा की गई संपत्तियों को मुक्त भी कराया गया है। अभी भी नौचंदी मैदान संबंधी कब्जे में कुछ लोग अपने पक्ष रखने आ रहे हैं। लेकिन यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। नौचंदी मैदान का राजस्व विभाग से पूरा रिकार्ड निकालकर पैमाइश कराई जायेगी। कब्जा की गयी जमीन को मुक्त कराने का हर संभव प्रयास किया जायेगा।
कुलविंदर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष
खास खबरें
करीब 25 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन के इस ट्रैक पर हो गया कब्जा
खसरा नंबर 4122 और 4160 में था घोड़ों का ट्रैक