मेरठ। सीएम योगी आदित्यनाथ की मेरठ में होने जा रही रैली को सफल बनाने के लिए इस बार भाजपाई एकजुट होते नजर आ रहे हैं। पिछली दो रैलियों के खराब अनुभव से भाजपाई फिर दो चार नहीं होना चाहते। इन रैलियों में अपेक्षाकृत भीड़ नहीं जुट पाई थी। इससे सबक लेकर इस बार भाजपाई अतिरिक्त मशक्कत कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव के बाद जब सीएम योगी ने सबसे पहली रैली भैसाली मैदान में की तो उसमें इतनी कम भीड़ देखकर सीएम का माथा ठनक गया था। वास्तव में उस रैली में इतनी कम भीड़ थी कि पुलिस आला अधिकारियों को मंच से ही अपने मातहत अधिकारियों को निर्देश देना पड़ा कि रैली में सभी को आने दें। किसी को रोका न जाए। बावजूद इसके भीड़ काफी कम रह गई। आरोप लगा कि भाजपाइयों की आपसी फूट से भीड़ नहीं आई। किसी ने इसके लिए मेहनत ही नहीं की।
हाल ही में निकाय चुनाव के दौरान प्रचार करने भी योगी मेरठ के रामलीला मैदान में आए। हालांकि इस बार भीड़ थोड़ा ज्यादा थी। लेकिन इतनी नहीं थी जितनी उम्मीद की जा रही थी। रही सही कसर यहां के महापौर चुनाव परिणाम ने पूरी कर दी। भाजपा हार गई और सीट बसपा के खाते में चली गई। ऐसे में भाजपाइयों पर लग रहे आपसी खींचतान के आरोप और प्रबल हो गए। कहा गया कि भाजपाइयों में धड़े बंदी इस कदर हावी हो गई है कि न तो रैलियों में भीड़ जुट रही है और न ही चुनावों के परिणाम पार्टी पक्ष में आ रहे हैं। पूर्व विधायकों, विधायकों के अलग गुट हो गए हैं तो सांसद का अलग गुट। इस तरह के आरोपों के कारण इस बार यह चुनौती बन गई कि छह जनवरी को मोहिउद्दीनपुर में होने जा रही सीएम की किसान रैली में भीड़ जुटे। इसका असर भी आ रहा है। इस बाबत सांसद, विधायक सब मेहनत करते नजर आ रहे हैं। इस बाबत सामूहिक रूप से सभी ने चीनी मिल में ही प्रेस वार्ता भी आयोजित की है। इस वार्ता में जहां सांसद राजेंद्र अग्रवाल मौजूद रहेंगे तो विधायक भी। देखना है वास्तव में यह कवायद कितना रंग दिखाती है।
खास बातें:
- सीएम योगी की छह जनवरी को मोहिउद्दीनपुर मिल में है किसान रैली
- पिछली रैलियों से सबक लेकर इस बार सामूहिक प्रयास में जुटे भाजपाई