मेरठ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा को लेकर जनसभा स्थल पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। सुबह से ही रामलीला मैदान को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जनसभा स्थल पर करीब 15 सौ पुलिसकर्मी जबकि एक हजार पुलिसकर्मी दिल्ली रोड में तैनात किए गए थे।
एसएसपी मंजिल सैनी के अनुसार रामलीला मैदान स्थित जनसभा स्थल पर छह एएसपी, 14 सीओ, 37 थाना प्रभारी/इंस्पेक्टर, 252 दरोगा, 18 महिला दरोगा, 72 एचसीपी और एक हजार सिपाही तैनात किए गए थे। तीन कंपनी पीएसी मैदान में लगाई गई थी। जबकि दो कंपनी पीएसी और एक हजार पुलिसकर्मी को मैदान के बाहर अलग-अलग प्वाइंटों पर लगाया गया था।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात डीएसपी रितेश कुमार शुक्रवार को ही सुरक्षा व्यवस्था के लिए लखनऊ से मेरठ आ गए थे। एक दिन पहले ही एटीएस की टीम के अलावा स्पेशल कमांडों ने मंच और हैलीपैड को अपनी निगरानी में ले लिया था। पांच भागों में सुरक्षा घेरा बनाया गया था। हैलीपैड पर जैसे ही मुख्यमंत्री का हेलीकाप्टर उतरा तो एटीएस और स्पेशल कमांडों ने सुरक्षा घेरा बनाकर स्थानीय अधिकारियों को भी नहीं आने दिया। पहली और दूसरी सुरक्षा श्रेणी में सिर्फ लखनऊ की सुरक्षा टीम लगी थी। मंच और सौ मीटर दूरी तक किसी भी पुलिस कर्मी को असलहे के साथ नहीं जाने दिया गया। मुख्य गेट और अंदर इंटेलीजेंस और एलआईयू के अधिकारी डॉग स्क्वाएड और बम निरोधक दस्ते के साथ चेकिंग में जुटे थे।
छतों पर रहा पहरा, दूरबीन से निगरानी
जनसभा स्थल के आधा किमी के दायरे में मकान और भवनों की छतों पर पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए थे। सुबह के समय जहां ड्रोन कैमरे से निगरानी की गई, वहीं मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान पुलिस दूरबीन से भीड़ पर पैनी नजर रखे हुई थी।
खास बात
- आधा कि मी के दायरे में मकानों की छत से की जा रही थी निगरानी
- 24 घंटे पहले ही आ गई थी एटीएस और स्पेशल कमांडो का दस्ता