स्वाइन फ्लू के 20 मरीज और मिल, संख्या पहुंची 248
- नहीं रुक रहा स्वाइन फ्लू, जागरूकता ही सहारा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। स्वाइन फ्लू रुकने का नाम नहीं ले रहा है। स्वाइन फ्लू के 20 नए मरीज मिले हैं। इनमें 15 मेरठ के हैं, जबकि पांच दूसरे जिलों के हैं। मेरठ जिले में अब तक 248 लोगों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। स्वाइन फ्लू को रोकने के स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयास फेल हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वाइन फ्लू को रोकने के लिए मात्र जागरूकता ही सहारा है। लोग एक दूसरे के संपर्क में आने से बचें। यदि अभी इसे काबू न किया गया तो सर्दियों में इसके वायरस को अनुकूल मौसम मिलेगा और ये तेजी से फैलेगा। मेरठ की बात करें तो अब तक के सालों में इस बार सबसे अधिक मरीजों को स्वाइन फ्लू ने अपनी चपेट में लिया है। मौत भी इस बार सर्वाधिक हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार ने बताया कि मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब से बुधवार को जिन लोगों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है, उनमें मेरठ से गुड्डी, अबरार अहमद, चार वर्षीय अथर्व, रजनी, रहमत, शोएब, साढ़े तीन साल का हरिदन, प्रेरणा शर्मा, एक साल की हिमांशी, अश्वनी, पंचूराम, साढ़े छह साल का नंदन शर्मा, छह वर्षीय अभियान, रीना जैन और रीता जैन हैं। इनकेअलावा मांगेराम निवासी शामली, हिना, ललिता त्यागी निवासी मुजफ्फरनगर, धर्मपाल सिंह और महावीर निवासी अमरोहा हैं।
माइक्रोबायोलॉजी लैब से अब तक 789 सैंपल में से 328 लोगों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें 83 लोग दूसरे जिलों के हैं। मेरठ के 245 लोगों को पुष्टि हुई है, जबकि मेरठ के तीन मरीजों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि दिल्ली की लैब से हुई थी। मेरठ में 12 महिलाओं समेत 19 लोगों की मौत हो चुकी है।
मेडिकल में भर्ती मरीजों को ही मिलेगी वीटीएम
मेरठ। एक तरफ स्वाइन फ्लू केमरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, तो दूसरी तरफ मेडिकल अस्पताल में वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया (वीटीएम) किट कम पड़ती जा रही हैं। नतीजतन, अब मेडिकल से निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के सैंपल के लिए वीटीएम नहीं दी जा रही है। यह सिर्फ उन मरीजों के लिए ही उपलब्ध हैं, जो मेडिकल अस्पताल में भर्ती हैं।
वीटीएम परखनलीनुमा होती है, इसमें विशेष प्रकार का केमिकल भरा होता है। इसके जरिए मरीज केथ्रोट स्वैब (गले की लार) का सैंपल लेकर उसे जांच के लिए मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजा जाता है। शुरू में मरीजों की संख्या कम थी, लिहाजा निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब से ही वीटीएम किट दी जा रही थी, लेकिन अब लगातार बढ़ती संख्या और कम होती वीटीएम केकारण निजी अस्पतालों को सैंपल के लिए मेडिकल की लैब से वीटीएम नहीं दी जा रही हैं।
माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग का कहना है कि इंडेंट (मांग पत्र) भेजा हुआ है। दो-तीन दिन में वीटीएम किट आ जाएंगी। इसके बाद निजी अस्पतालों को भी दी जा सकेंगी। अभी इतनी वीटीएम नहीं हैं कि इन्हें निजी अस्पतालों को दी जा सकें। करीब 300 वीटीएम हैं। यहां कमी हो गई तो दिक्कत हो जाएगी। निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों को डॉक्टर मार्केट से वीटीएम खरीदवाकर भी सैंपल भेज सकते हैं। मार्केट में वीटीएम लगभग डेढ़ सौ रुपये में उपलब्ध है।
स्वाइन फ्लू से ग्रसित बच्चों के लिए आई सीरप
मेरठ। स्वाइन फ्लू से ग्रसित बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास 40 सीरप आ गई हैं। यह पाउडर के रूप में है। इसकी शीशी में गर्म पानी को ठंडा कर डाला जाता है और इसे लिक्विड बनाया जाता है। इसे एक साल तक के बच्चे आसानी से ले सकते हैं, उन्हें टेमी फ्लू की टेबलेट लेने में दिक्कत आती है। मेरठ में अब तक एक साल से कम उम्र के पांच बच्चे स्वाइन फ्लू से ग्रसित मिल चुके हैं।
वैक्सीन नहीं आई
मेरठ। स्वास्थ्य विभाग के पास 15 हजार टेमी फ्लू की टेबलेट, एक हजार मास्क, 125 पर्सनल प्रोटेक्शन (पीपी) किट आ चुकी हैं, लेकिन वैक्सीन अभी नहीं आई है। इसकेलिए कई बार मांग पत्र भेजे जा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 300 वॉयल वैक्सीन की मांग की है।